Hello Family…

I’m sharing my poem on sunset…. I hope you’ll love it…..

I can do only imaginations but you can relate if you experienced this….

We all have some memories with sunset, I don’t have as such but yeah I can imagine….. 

Enjoy it

।।जब आफताब को डूबते देखूं।।

तू मेरे साथ बैठा हो
कुछ बातें ना हो
बस हमारा साथ हो
जब आफताब को डूबते देखूं

हाथों में मेरे तेरे हाथ हों,
तेरे कांधे पर सर रख,
दिन से ये शाम हो।
दिन और रात का मिलन,
इस संध्या में जैसे हो,
ठीक वैसा हमारा मिलन हो।

कहीं और न देखूं,
बस तेरी आंखों में मैं,
आफताब को ढलते और,
महताब को चढ़ते देखूं।

संध्या की लालिमा को,
तेरे अधरों पर देखूं,
मुक्कमल पाऊं इस साथ को,
जब आफताब को डूबते देखूं।

I want to ask you all:

What you feel when you are in love……?

Hahahahahahaha

Sounds weird naa….

Waiting for your answers….

(P.S.  In display picture it’s me watching sunset)

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Abhishek Sharma

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