• ____गलती___

एक छोटा सा शब्द पर अर्थ इसका है गहरा..…
मान लो तो सीख जिंदगी भर की…
और बेपरवाह रहो तो तड़प हर पल की….

आखें बंद करके ही दोहरा जाती है सारी बीती जिंदगी….
और याद आता है कब-कब की गलती और कब-कब की बंदगी…
एक गलती आज तक मुझको तड़पाती रहती है….
भूल की जो लोगों को समझने में वो आज याद आती है…

और सबसे बड़ी गलती थी न सीख पाना उस गलती से…
दिल टूटता है बार-२, पर फिर भी क्यों दोहराऊ इसे…
क्या करूं गलती भी तो की मैंने फिर दोष आखि़र किसपर
लगाऊँ,
खुद ही संभलूं ,खुद ही गिर जाऊं, खुद को अब कैसे समझाऊं….

____गलती या सीख___ 1

 

जीवन में हमसे कई बार बहुत सारी गलतियां हो जाती हैं, कभी-२ अनजाने में तो कभी-कभी हम जानबूझकर भी गलतियां कर जाते हैं, लेकिन कुछ ऐसी गलतियां भी होती है जो हमें जीवन भर तड़पाती रहती हैं और हमें उन गलतियों का एहसास होता रहता है, यह स्वभाविक है कि मनुष्य गलतियां करता रहता है लेकिन बार बार उन गलतियों को दोहरा कर हम अपने आप को ही कष्ट देते रहते हैं, हमें लगता है कि हम कुछ नहीं कर पा रहे ,गलतियां बस दोहराई जा रही हैं ,लेकिन गलतियों को दोहराना हमारे हाथ में ही होता है…….

जब भी हम बैठकर अपनी बीती जिंदगी के बारे में सोचते हैं,तब हमें बहुत सारी गलतियां याद आती हैं जिसे हम चाहते हैं कि काश हमने वह गलतियां ना की होती तो आज हमारा वर्तमान अच्छा होता..…

लेकिन मैं यह कहना चाहती हूं कि हमें गलतियों को याद तो रखना चाहिए लेकिन उन्हें अपनी जिंदगी में ज्यादा शामिल नहीं करना चाहिए, जो गलती हमने एक बार बीती जिंदगी में कर दी हमें उससे सीख लेनी चाहिए और उन्हें दोबारा दोहराना नहीं चाहिए, वह गलतियां अब हो चुकी हैं उन्हें अब सुधारा नहीं जा सकता इसलिए उन गलतियों को बार-बार याद करके उन गलतियों पर पछतावा करने की बजाय हम उन गलतियों से सीख कर अपनी जिंदगी को बेहतर बना सकते हैं , लेकिन यह मनुष्य की प्रवृत्ति है कि वह अपनी गलतियों को भुला ही नहीं पाता और अपने वर्तमान जीवन की बजाय बीती जिंदगी में जीना पसंद करता है परंतु हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि हमें वर्तमान में ही जीवन जीना चाहिए इससे हमारे भविष्य में भी अच्छा प्रभाव पड़ेगा ,इसलिए वर्तमान में गलतियां ना करके और बीत गयी जिंदगी में की गई गलतियों को ना दोहरा के हम अच्छी जिंदगी जी सकते हैं..….

कई बार हम एक दूसरे को समझने में भी गलती कर जाते हैं जैसे कि हमें मनुष्य के असली स्वरूप का पता ही नहीं चल पाता, इसमें हमारी गलती नहीं होती इसमें समझने वाली बात यह है कि हर व्यक्ति जैसा होता है वैसा वह व्यक्त नहीं कर पाता, वह मन में जो भी सोचता है वह वैसा बोलता नहीं है , इसलिए अक्सर हम एक दूसरे को पहचानने में गलती कर जाते हैं ,क्योकि यह मनुष्य की प्रवृत्ति है कि वह जो असल में होता है मैं वह व्यक्त नहीं करता, इसके बजाय वह व्यक्त करता है , जो  उसे उस  समय के अनुसार सही लगता है या उसके मतलब के अनुसार सही लगता है ,इसमें हमारी गलती नहीं है कि हमने लोगों को पहचानने में गलती की और हमने धोखा खा लिया ,इसमें  सीखने की यह बात है कि किसी पर भी इतना जल्दी विश्वास मत करें उनको अच्छे से परखने के बाद उनके व्यवहार और उनकी सोच को समझने के बाद ही उनसे व्यवहार करें….…

कई बार हम गलतियां जानबूझकर भी नहीं दोहराते बल्कि वह बार-बार दोहराई जाती हैं क्योंकि वह गलतियां हमारी आदतों में शामिल होने लगती हैं ,हमें ऐसा लगता है कि हम उसे दोहरा नहीं रहे लेकिन फिर भी वह हमारी जिंदगी में इतनी शामिल हो चुकी होती हैं कि हम उसे अपनी जिंदगी में दोहराने लगते हैं ,यह भी हमारी बहुत बड़ी गलती है , फिर वह गलती हमारी आदत बन जाती है और हमें हर बार उस गलती का पछतावा होता है और हम अपने आप को कोसते रहते हैं कि क्यों वह गलती हम से दोहराई जाती हैं लेकिन हम यह भूल जाते हैं कि हम वह गलती बार-बार करने से वह गलती हमारी आदतों में शामिल हो चुकी है ,अब उसे हमारी आदत से निकालना बहुत मुश्किल हो गया है…..

इसलिए ध्यान रखें कि जब भी आप कोई गलती करते हैं चाहे अनजाने में चाहे जानबूझकर उस गलती को आप बार-बार मत दोहराएं, इससे वह आपकी आदत में शामिल हो जाएगी और आपको ही उससे बहुत कष्ट होगा, इसलिए आप गलती से सीख कर आगे बढ़े, बार-बार उस गलती के बारे में मत सोचें और अगर आप उस गलती को बार-बार दोहरा रहे हैं ,अगर वह गलती आपकी आदत बन चुकी है, तो आप इस बात का ध्यान रखें कि आप उस गलती को कैसे अपनी आदत से निकाले और अपनी जिंदगी को और भी बेहतर करें…

हमसे गलतियां होती रहती हैं और गलतियां करना मनुष्य की प्रवृत्ति है, लेकिन गलतियों को मत दोहराएं ,गलतियों से सीखें और जीवन में हमेशा आगे बढ़ते जाएं और जीवन में हमेशा अपने आप को और बेहतर करते जाएं….

मुझे उम्मीद है कि आपको मेरी कविता और मेरे विचार अच्छे लगेंगे ,आप सब भी इससे कहीं ना कहीं जुड़े हुए हैं क्योंकि हम सभ गलतियां करते हैं और उसका पछतावा भी हमें होता रहता है इसलिए हम सब एक ही हैं , हमारे विचार और हमारे काम भी कहीं ना कहीं एक ही है क्योंकि हम सभी मनुष्य हैं और मनुष्य की प्रवृत्ति एक जैसी ही होती है …

हमें  जरूरत है बस एक दूसरे को समझने की एक दूसरे की मदद करने की और एक दूसरे को और भी बेहतर बनाने की….😊😊

आप सभी अपने-अपने विचार, आपकी गलतियों से सीखी गई सीख ,आपके तजुर्बे और अनुभव मेरे साथ सांझा करें…. इस पोस्ट पर कमेंट करके जरूर बताएं कि आपको यह कैसा लगा…..

आप सब का बहुत-बहुत धन्यवाद🙏🙏

मुझे आपके सहयोग की बहुत ज़रूरत है🙏🙏

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Gorvi Sharma

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