Disclaimer: मुझे हिंदी में कविता कहते नहीं आती, इसलिए त्रुटियों के लिए क्षमा! 😅🙏🏻 ये शब्द बस मन से निकले हैं किसी के लिए, और थोड़ी rhyming की कोशिश की गई है, so bear with me!

हम तो सहमे से बैठे थे
कोने में, लिखते रहते थे।
कभी न सोचा इस से आगे
बस सुनते थे कान लगा के,
किसने किसको क्या बतलाया
Comments में अपना प्यार लुटाया!
सबसे हम अंजान खड़े थे
बन कर हम मेहमान खड़े थे।
फिर उसने हमको पास बुलाया,
प्यार से अपना नाम बताया।
बोले, बेटे सब कर लेना
लेकिन बस “aunty” मत कहना!
सुन कर लगा थोड़ा अच्छा
कि किसीने तो समझा हमको बच्चा!
रोज़ वो सबके articles पढ़ कर,
शाबाशी दे जातीं हंस कर।
हमने सोचा, हैं ये कौन?
कहा नहीं कुछ, बने रहे मौन।
और एक दिन उनका email पाया
बातें करने मन ललचाया!
झटपट मिला फिर ऐसा welcome
सदियों से जैसे दोस्त हों हम!
चल पड़ा बातों का सिलसिला
उनसे share किया हर शिकवा गिला।
कैसे सहज वो घुलमिल जातीं!
सबको अपना दोस्त बनातीं
स्वामी जी के निकट ले जातीं,
हँसतीं, गातीं, कहानियां सुनातीं
किस्सों में भक्ति सिखलातीं
कृष्णा की मीरा बन जातीं..
ऐसी उनकी प्यार की भाषा
सुन कर छू हो जाए निराशा!
बंधातीं प्रिय से मिलन की आशा
भक्ति की वो हैं परिभाषा!
मोहन से मिलने को अधीरा
हम सबकी प्यारी वो, मीरा ❤️

Love You Meera Maa 🤗

The picture has been dug out from old sketches dating back to school days.

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Niveta

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