दिन के उजाले ने सारे राज छिपा दिए।

अगर ये रात ना होती,

तो सितारों का पता ही ना चलता।

सितारों की चादर ओढ़े,

कहती है बहुत कुछ ये दुनिया।

कहती है जा परे रात दिन के,

अस्तित्व केवल धरा तक नहीं सिमटा।

है रहस्यमई लेकिन ये,

खुद खोजती है वो अंखियां।

जो सुलझाए इस पहेली को,

ढूंढती है उसे ये सदिया।

नहीं लगता मुझको केवल

 ये जन्म मरण का खेल।

कुछ तो है जो इन सबसे ऊपर,

चाहूं मै उसको खोजना।

मैंने इस कविता को 7-8 महीने पहले लिखा था। लेकिन पोस्ट नहीं किया था। Save draft में save था। मेरी पहली कविता है जिसे मैंने self discovery  पर लिखा था। जब मै शुरू शुरू os.me पर आयी थी। आज मै इसे आप लोगो के साथ साझा कर रही हूं।

Since ,I have to write at least 150words  to publish this post.

I am going to share with you few lines ,which I say to my mind always when it gets too negetive or makes me anxious or in doubts.

“This is a phase, this will pass.

Don’t worry my mind ,just shut up.”😁😁

You can try it too.😊

Thank you so much all of you for reading this .🙏. My gratitude to all of you.

Swami❤️🙏.

Jai shri Hari❤️.

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Abha

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