जब तुम न समझ पाओ
मेरे अनंत शब्दों के सागर को,
जब मैं न समझ पाऊँ
तुम्हारे बदलते रंगों के बादल को,
मैं दूँगी- शब्द तुम्हारे रंगों को,
और तुम मेरे शब्दों को रंग देना।

रंगों को समझने की आदत नहीं है इतनी,
दिल की गहराई में तुमसे चाहत है जितनी,
बस शब्दों के ज़रिये
कुछ उलझे माँझे सुलझाना जानती हूँ,
इश्क़ का रंग जो तुमने दिया-
तुम्हें ही अब अपना ख़ुदा मानती हूँ!

धीरे-धीरे तुम्हारे रंग में रंग जाऊँगी,
और तुम मेरे शब्दों को रंग देना।

Story:

Two misfits tried to fit together.

One was all about words, poetry and literature —

Love to her looked like the words of Gibran, Rumi and Lalla…

The other was a Visual poet- the colours made sense to him —

Designs and shades was his world…

No matter how hard she tried to convey- in simple woven words —

The Love poem could never reach his heart!

So she asks him, pleads and begs for the last time —

Would he colour her words of Love?

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Taahira Kisna

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