हम में से अधिकांश लोग बड़ी लंबी चौड़ी प्लानिंग किया करते हैं, ऐसा कर लेंगे वैसा कर लेंगे असली वाली प्लानिंग बहुत कम लोग कर पाते हैं। जिसने असली वाली प्लानिंग कर ली उसकी जिंदगी सार्थक हो जाती है ।हम अपना जन्मदिन मनाते समय खूब पार्टियां करते हैं खूब खुशी मनाते हैं पर सच तो यही है, हम निश्चित सांसों में से ढेर सारी सांसे गवा  चुके होते हैं जो हमें मिली थी। हमारे संसार में ज्यादातर लोग बेहोशी में जी रहे हैं ।इसी बेहोशी और अंधेरे में जीना उन्हें अच्छा लगता है। अगर कोई उन्हें इस बेहोशी से जगाना चाहे तो उन्हें बहुत बुरा लगता है ।क्योंकि नींद में रहने का ,अंधेरे में रहने का एक अपना अलग ही मजा है  

                   2 साल पहले की बात है होली से करीब 1 हफ्ते पहले मैं अपने क्लास से वापस लौट रहा था ।उस समय मेरी साइकिल चोरी हो गई थी और पढ़ने के लिए मैं पैदल ही  जाया करता था।अपने क्लास से वापस आ रहा था । 1 दिन भी मैं क्लास मिस नहीं करना चाहता था इसलिए निश्चित रूप से कंपटीशन की क्लास अटेंड करना हमारे लिए आवश्यक बन गया था ।रास्ते में हमने देखा मेरे पीछे से एक छोटा सा लड़का जो मुश्किल से 6 वर्ष का होगा वह एक छोटी वाली साइकिल पर आ रहा था और थोड़ी उद्दंडता करते हुए आ रहा था ।वैसे उद्दंडता नहीं चाहिए इसे बचपना कहना चाहिए बचपन में बदमाशी ना हो तो कब हो ।उसने अपने छोटी वाली साइकिल से मुझे हल्का सा धक्का मारा। मैं थोड़ा सा नाराज हुआ और उसे ठीक से साइकिल चलाने की सलाह देकर छोड़ दिया ।और वह लड़का साइकिल चलाते हुए मेरे से आगे निकल गया लगभग 3 या 4 मिनट के बाद उसी रास्ते में आगे बढ़ते हुए मैं चला जा रहा था,पर मालूम चला जिस प्यारे बच्चे को अभी हमने थोड़ी सी डांट लगाई थी, उसकी तड़पती हुई और दम तोड़ती  देह मेरे सामने पड़ी हुई थी ।मालूम चला एक ट्रैक्टर ने सामने से आकर प्यारे बच्चे को ठोकर मार दी वह बच्चा गिर गया और ट्रैक्टर का अगला चक्का उस बच्चे के सिर पर चढ़ गया उसका सिर खरबूजे की तरह फट गया ।और उसके सिर सेअभी गरम गरम और फेन युक्त रक्त  का फब्बारा बहुत तेजी से निकल रहा था ।मैंने कहा जल्दी से उठाओ और हॉस्पिटल ले चलो। एक आदमी सामने आया उसके शरीर को उठाया और उठाते उठाते उसने दम तोड़ दिया। मतलब धक्का लगना ,उसका सर फटना और दम तोड़ देना इन तीनों काम में मुश्किल से 2 से 3 मिनट का समय लगा। मैंने इतनी नजदीक से ऐसा गंभीर एक्सीडेंट कभी नहीं देखा था ।वह घटना मुझे कई दिनों तक परेशान करती रही ।मैं सोचने पर मजबूर हो गया की मात्र 3 मिनट पहले वह बच्चा अपने घर से हंसता खेलता निकला होगा ।खिलखिलाता हुआ साइकिल चलाता हुआ निकला था। उसके मम्मी पापा उसका इंतजार कर रहे होंगे गुस्से में बडबडा रहे होंगे कि उनका नटखट बेटा अभी तक वापस नहीं आया है ।लेकिन जब उसके मां-बाप को उनके बेटे की ऐसी लाश दिखेगी तो उनके ऊपर क्या बीतेगी। सर एकदम चिपटा हो गया था क्योंकि ट्रैक्टर का चक्का उसके सर पर चढ़ गया था ।आप कल्पना नहीं कर सकते कैसा भयावह दृश्य था।

              इस घटना के लिए किसको दोष दिया जाए ,,,,,,,ट्रैक्टर वाले को या उस नटखट से बालक को या बच्चे के मां-बाप को या उस बच्चे के प्रारब्ध को,,,, मैं किसी को दोष नहीं देना चाहता पर यह सुनिश्चित है हम में से कोई भी कभी भी इस दुनिया से एक्सपायर हो सकता है ।हमारी डेट ऑफ मैन्युफैक्चरिंग हमें मालूम है इसलिए हम खूब उछल उछल कर जन्मदिन मनाते हैं लेकिन डेट ऑफ एक्सपायरी नहीं मालूम।

        एक और घटना है मेरी चचेरी बहन आरती सिंह जो होली के दिन अपनी मम्मी के कहने पर दुकान से कुछ सामान लाने के लिए गई।  12 साल की लड़की थी और किसी भी तरह से उसे कोई बीमारी नहीं थी ।वह छोटा मोटा घर का सामान खरीद कर वापस आ रही थी कि घर पहुंचने से मुश्किल से 20 मीटर पहले वह गिर पड़ी और गिरते ही उसने दम तोड़ दिया। जब तक कोई कुछ समझ पाता तब तक वह इस दुनिया को छोड़ कर जा चुकी थी ।मात्र 12 साल की लड़की। मेरी चाची उस दिन इतना रोई थी लगातार 7 घंटे तक रोती रही थी। और उसके बाद वह बेटी के चले जाने पर इस तरह रोग ग्रस्त हो गई उनका पूरा शरीर बीमारी का घर बन चुका है ।कहने को तो वह बहुत धनवान हैं, लेकिन उस धन का 100 वां हिस्सा भी वह उपभोग नहीं कर पाती ।कुछ तो कारण है जो हम जीवन में कहीं ना कहीं खाली रह जाते हैं ।हमें अपनी प्लानिंग करनी चाहिए साथ ही इस बात का भी ख्याल रखना चाहिए कि मनुष्य जन्म बहुत अनमोल है यह कभी भी खत्म हो सकता है। असली एडवांस वही लोग होते हैं तो सिर्फ आने वाले 20 या 30 वर्षों की प्लानिंग नहीं करते बल्कि जीवन के बाद भी जीवन है ऐसा सोचकर प्लानिंग करते हैं वही वास्तविक एडवांस कहलाने वाले लोग हैं। हमें अपनी आध्यात्मिक पृष्ठभूमि को अनदेखा नहीं करना चाहिए। क्योंकि अगर हमारी अध्यात्मिक झोली फटी रह गई तो फिर इस बात का ठिकाना नहीं ऐसा अवसर दूसरी बार हमें मिल ही जाए ।हमारे सारे शास्त्र यही कहते हैं मनुष्य जन्म बहुत ही दुर्लभ है इन्हें यूं ही नहीं गवा देना चाहिए। युवा पीढ़ी बोलती है,,,,  जिंदगी ना मिलेगी दोबारा,,,,, जितना मस्ती करना है कर लो। बेचारे बात तो समझते नही हैं ।वो बस समझते हैं कि जिंदगी छोटी है जो करना है कर लो उसके बाद तो फिर मरना तो है ही। उसे यह नहीं पता है कि मरता तो हमारा सिर्फ शरीर है पर हमारी आत्मा तो हमेशा जीवित रहती है और हमारे कर्म का फल आत्मा को मिले हुए  नए शरीर को अवश्य भोगना पड़ता है ।भगवान श्री कृष्ण गीता में कहते हैं

अवश्यमेव भोक्तव्यम कृतम कर्म शुभा शुभम

अर्थात हमें अपने कर्मों का फल निश्चित रूप से भोगना ही पड़ता है। हमें कर्म करने में सावधान रहना चाहिए और लाइफ ना मिलेगी दोबारा इसका वास्तविक अर्थ समझना चाहिए। इसका वास्तविक अर्थ यही है कि हमें होश में और उजाले में जीने की आदत रहनी चाहिए ।हमें जागरुक होकर जीना चाहिए हमें अपने कर्मों के प्रति सचेत होना चाहिए ।यही वास्तविक अर्थ है लाइफ ना मिलेगी दोबारा का ।os.me परिवार के सभी सदस्यों को मेरा प्यार भरा नमस्कार, जय श्री हरि 🙏🙏🌻🌻🌼🌼🌴🌴🌿🌿🌲🌲🌾🌾🥀🥀🌱🌱🌳🌳

 

 

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Ashu Harivanshi

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