ये subject मेरे दिल के बहुत करीब है. शायद आप सब के भी. और मेरी ही तरह आप सब भी इसे थोड़ा गहराई से समझने की चाह भी रखते ही होंगे.

चूँकि मेरी  अपनी सोचने की भाषा हिन्दी, रोने -हँसने की भाषा हिन्दी, लड़ने-लड़ाने की भी हिन्दी, तो अब से सोच को ज़्यादा मोच न देते हुए, लिखने की भी हिन्दी ही रख रही हूँ 🤗

तो  चलिए थोड़ा google जी को खंगाला जाए? “

Emotions ” लिख दिया search bar में.

ये क्या, यहाँ तो ज्ञान का भण्डार है – 

1.  Anatomy of Emotions :

 वाह क्या क्या लिखा है.

–   Emotions brain के एक हिस्से में ही उपजती हैं, कोई ‘amagota’ नाम का एक छोटा सा स्थान है….

How Emotions originate :

Google Baba कह रहे हैं  – बाहरी stimulus और आतंरिक भी – इससे भावनाएं originate होती हैं.

How many types are there :

Basic तो 6 हैं और ज़्यादा discriptive तो 24.

( वैसे अपने यहाँ तो नव रस की बात सुनने को

मिलती है )

Anger,

Joy,

Fear,

Disgust,

Surprise,

Sad

यानि 

गुस्सा, ख़ुशी, डर, घृणा, हैरानी, उदासी

भले 6 हों, 9 अथवा तो 24 या और ज़्यादा. मेरी दिलचस्पी तो इन्हें जड़ से समझने में है…

नहीं, नहीं……थी.

क्योंकि बस एक google search ने मेरे होश उड़ा दिए. समझ आ गया की इतना भी आसान नहीं ये सब. जिसे समझने में doctors, researchers, saints सालों साल लगा देते हैं, उस शब्द को बस अनुभव ही करो. समझने के लिए अगला जन्म लगाना😷

तो जी मेरी गाड़ी तो गई है अब रुक.

चलो Reverse gear लगाती हूँ. थोड़ा पीछे चलती हूँ. और बताती हूँ अपना एक छोटा सा अनुभव.

न जाने कितनी साँसे मैंने केवल और केवल भावनाओं की हवा में ही सांस लेते, उठते, बैठते, खाते, पीते, सोते, जागते बिताई होंगी.  उन्हीं में से एक भाव था जीवन को समझने का.

एक दिन एक बहुत ही सरल हिन्दी में  spirituality पर लिखी किताब में एक उदाहरणा था, और उन 4-5 वाक्यों से बहुत कुछ समझ आ गया. 

घटना कुछ ऐसे थी –

मान लीजिये आपने कोई बड़ा exam clear किया, या आप का प्रमोशन हुआ, या नये घर या गाड़ी की आप ख़ुशी मना रहे हैं. Party कर रहे हैं. बहुत खुश हैं. खाना पीना, नाचना चल रहा है तभी फ़ोन की घंटी बजती है. बस एक वाक्य – “आपके पिता / बेटे / किसी बहुत प्यारे का एक्सीडेंट /मौत हो गई. उसी पल आपकी सारी ख़ुशी गायब. उस खाने में से स्वाद गायब, दारू में से नशा छू मंतर, महफ़िल की रंगीनी गायब….

कहाँ गया ये सब!!!!

और, गम के आँसू चालू. या तो डर के बादल, या घबराहट और चिंता की आंधी………

बस एक message ही तो था जिससे सारा का सारा माहौल पूरी तरह उलट गया. तो ये कैसे हुआ, क्यों हुआ? विचार कीजिये.

बस मेरे विचार भी कुछ ऐसे आगे बढ़े की subject की तह तक ले ही गए.

Emotions….. भावनाएं…. कितनी ताकत है न इनमें. लगभग सम्पूर्ण मानव जाति इनके चंगुल में इस कदर गहरी फंसी हुई है की विचारों की भी धज्जियाँ उड़ जाती हैं. और कभी तो ये भावनाएं ऐसा सुन्दर सृजन कर डालती हैं की विचार बहुत बौने हो जाते हैं.

दशरथ मांझी, The Mountain Man,* की 22 साल की दृढ़ता और मेहनत  से बनी वो सड़क…. मुझे तो भावनाओं का इन आंखों से दिखता रूप ही लगता है.

( *अगर नहीं देख पाए तो अवश्य देखिए ये हिन्दी movie )

To sum it up,

–  Emotions when find practical grounds and become our own EXPERIENCE, they allivate our soul to next level, that’s for sure. Slowly but surely we have to keep untying the knots, one at a time, and experience the blissful outcome.

Emotions, when in knots, made me cry a lot , made me sad and depressed, and on some rare occasions made me feel overjoyed as well. And Once untied and understood a bit, they now flow like a peceful river. 

I feel overjoyed to imagine how liberating it would be to be the master of these sweet creatures called EMOTIONS.

Perhaps PEACE and contentment are THE ULTIMATE emotions. Maybe somewhat like the vast, peaceful ocean🤔 I have yet to figure out and experience this in totality.

It takes time though, a lot of time, perhaps many lives…🤔

तो लीजिए मेरा लिखना हुआ ख़तम. मुझे तो बहुत मज़ा आया.

आप को भी आएगा.पढ़ने से ज़्यादा खुद लिखने में.

So do share your heart as well❤❤🤗

🌹🌹🌹🌹🌹ज य श्री हरि 🌹🌹🌹🌹