भगवन कृष्ण और चींटी की कथा 

 

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श्री कृष्ण भगवान जी कहते हैं जिस प्रकार की चींटी एक बार दीवार पर चढ़ते चढ़ते गिरती है, 2 बार गिरती है, 10 बार गिरती है, 20 बार गिरती हैं, पर बार बार गिरने पर भी वह अपना हौसला नहीं हारती,और अंत में बार बार प्रयत्न करने पर वह अपने लक्ष्य में कामयाब हो जाती है और दिवार पर चढ़ जाती है, इसी प्रकार हमें भी चींटी से सबक लेना चाहिए, हमें अपनी कोशिश जारी रखनी चाहिए, हमें भी परमात्मा प्राप्ति के रास्ते में एक दिन सफलता जरुर मिलेगी |

एकदम से हम परमात्म प्राप्ति की उस अवस्था को प्राप्त नहीं कर सकते, आइये, इस बात को हम एक कथा के माध्यम से समझते है:-

एक बार एक संत से पढ़े लिखे एक व्यक्ति ने कहा, कि मैंने सुना है आपने परमात्मा के दर्शन कर रखे हैं, कृपया करके मुझे भी परमात्मा का साक्षत्कार करवाइए , तो उस संत ने व्यक्ति से कहा आप कितना पढ़े हैं?

उस व्यक्ति ने कहा मैं एम ए पास हूं, मेरे पास m.a. की डिग्री है |

तो संत ने कहा मैं तो 5 पांच पढ़ा हूं, क्या तुम मुझे m.a. की डिग्री लाकर दे सकते हो?

तो उस व्यक्ति ने कहा ऐसे कैसे हो सकता है,  5 पढ़ने के बाद सीधा m.a. की डिग्री नहीं प्राप्त की जा सकती, इसके लिए आपको निरंतर पढ़ाई करनी पड़ेगी|

इसी प्रकार उस संत ने एम ए पास व्यक्ति को समझाया कि परमात्मा की प्राप्ति भी अभ्यास के द्वारा ही की जा सकती हैं, निरंतर अभ्यास से कोशिश से हमारे परमात्मा मिलन की इच्छा पूरी हो सकती है |

इसलिए हमे अपने श्वास श्वास से परमात्मा को याद करना चाहिए ।

आम इंसान रोजाना  24000 श्वास लेता है, जोग कलपतर, एक जोगियों का ग्रंथ है जिसमें दर्ज है कि एक जोगी या संत 21624 श्वास रोजाना लेता है |

परंतु सामान्य व्यक्ति 24000 श्वास लेता है और एक संत के बाकी के श्वास उनके खाते में जमा हो जाते हैं, जिस प्रकार एक सरकारी नौकरी करने वाले की तनख्वाह का कुछ हिस्सा जमा होता रहता है, रिटायरमेंट के बाद उससे मैं थोड़ा थोड़ा करके मिलता रहता है, इसी प्रकार सच्चे जोगी या संत परमात्मा की नौकरी करते हैं, रात दिन परमात्मा की याद में गुजारते हैं और उनके 21624 श्वास निकलते हैं और बाकी के स्वास जमा हो जाते हैं इसी कारण जोगियों की उम्र बड़ी होती हैं |

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Sonia Kamboj

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