सुन्दरानना – Sundaranana

सुंदरानना, सुंदरानना
हर शिव शिव हर सुंदरानना

भस्म भूषिता हर सुंदरानना
काल नेत्र मदन मोहन सुंदरानना
भुत नाथ देव देव सुंदरानना

चन्द्रशेखर हर सुंदरानना
डमरू धर डमरक डमरक सुन्दरणा
नीलकांत नागर सुंदरानना
हर शिव शिव हर सुंदरानना


श्री शिव नटराज स्तुति

सत सृष्टि तांडव रचयिता
नटराज राज नमो नमः…
हेआद्य गुरु शंकर पिता
नटराज राज नमो नमः…

गंभीर नाद मृदंगना
धबके उरे ब्रह्मांडना
नित होत नाद प्रचंडना
नटराज राज नमो नमः…

शिर ज्ञान गंगा चंद्रमा
चिद्ब्रह्म ज्योति ललाट मां
विषनाग माला कंठ मां
नटराज राज नमो नमः…

तवशक्ति वामांगे स्थिता
हे चंद्रिका अपराजिता
चंहु वेद गाए संहिता
नटराज राज नमोः…।


Adiyogi: The Source of Yoga

दूर उस आकाश की गहराइयों में
इक नदी से बह रहे हैं आदियोगी

शून्य सन्नाटे टपकते जा रहे हैं
मौन से सब कह रहे हैं आदियोगी

योग के इस स्पर्श से अब योगमय
करना है तन मन

सांस शाश्वत, सनन सननन
प्राण गुंजन, धनन धननन

उतरें मुझ में आदियोगी
योग धारा छलक छनछन

सांस शाश्वत, सनन सननन
प्राण गुंजन, धनन धननन

उतरें मुझ में आदियोगी
उतरें मुझ में आदियोगी

पीस दो अस्तित्व मेरा
और कर दो चुरा चुरा

पूर्ण होने दो मुझे और
होने दो अब पूरा पूरा

भस्म वाली रस्म कर दो आदियोगी
योग उत्सव रंग भर दो आदियोगी

बज उठे ये मन सितारी,
झनन, झननन, झनन, झननन

सांस शाश्वत, सनन सननन
प्राण गुंजन, धनन धननन

सांस शाश्वत, सनन सननन
प्राण गुंजन, धनन धननन

उतरें मुझ में आदियोगी
योग धारा छलक छनछन

सांस शाश्वत, सनन सननन
प्राण गुंजन, धनन धननन

उतरें मुझ में आदियोगी
उतरें मुझ में आदियोगी


श्री शिव रूद्राष्टकम

नमामीशमीशान निर्वाण रूपं, विभुं व्यापकं ब्रह्म वेदः स्वरूपम् ।
निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं, चिदाकाश माकाशवासं भजेऽहम् ॥
 
निराकार मोंकार मूलं तुरीयं, गिराज्ञान गोतीतमीशं गिरीशम् ।
करालं महाकाल कालं कृपालुं, गुणागार संसार पारं नतोऽहम् ॥
 
तुषाराद्रि संकाश गौरं गभीरं, मनोभूत कोटि प्रभा श्री शरीरम् ।
स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारू गंगा, लसद्भाल बालेन्दु कण्ठे भुजंगा॥
 
चलत्कुण्डलं शुभ्र नेत्रं विशालं, प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम् ।
मृगाधीश चर्माम्बरं मुण्डमालं, प्रिय शंकरं सर्वनाथं भजामि ॥
 
प्रचण्डं प्रकष्टं प्रगल्भं परेशं, अखण्डं अजं भानु कोटि प्रकाशम् ।
त्रयशूल निर्मूलनं शूल पाणिं, भजेऽहं भवानीपतिं भाव गम्यम् ॥
 
कलातीत कल्याण कल्पान्तकारी, सदा सच्चिनान्द दाता पुरारी।
चिदानन्द सन्दोह मोहापहारी, प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी ॥
 
न यावद् उमानाथ पादारविन्दं, भजन्तीह लोके परे वा नराणाम् ।
न तावद् सुखं शांति सन्ताप नाशं, प्रसीद प्रभो सर्वं भूताधि वासं ॥
 
न जानामि योगं जपं नैव पूजा, न तोऽहम् सदा सर्वदा शम्भू तुभ्यम् ।
जरा जन्म दुःखौघ तातप्यमानं, प्रभोपाहि आपन्नामामीश शम्भो ॥
 
रूद्राष्टकं इदं प्रोक्तं विप्रेण हर्षोतये
ये पठन्ति नरा भक्तयां तेषां शंभो प्रसीदति।। 


शिवतांडव स्तोत्रम

 जटाटवीगलज्जल प्रवाहपावितस्थले
गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजंगतुंगमालिकाम्‌। 
डमड्डमड्डमड्डमनिनादवड्डमर्वयं
चकार चंडतांडवं तनोतु नः शिवः शिवम ॥1॥
 
जटा कटा हसंभ्रम भ्रमन्निलिंपनिर्झरी ।
विलोलवी चिवल्लरी विराजमानमूर्धनि ।
धगद्धगद्ध गज्ज्वलल्ललाट पट्टपावके
किशोरचंद्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं ममं ॥2॥
 
धरा धरेंद्र नंदिनी विलास बंधुवंधुर-
स्फुरदृगंत संतति प्रमोद मानमानसे ।
कृपाकटा क्षधारणी निरुद्धदुर्धरापदि
कवचिद्विगम्बरे मनो विनोदमेतु वस्तुनि ॥3॥
 
जटा भुजं गपिंगल स्फुरत्फणामणिप्रभा-
कदंबकुंकुम द्रवप्रलिप्त दिग्वधूमुखे ।
मदांध सिंधु रस्फुरत्वगुत्तरीयमेदुरे
मनो विनोदद्भुतं बिंभर्तु भूतभर्तरि ॥4॥
 
सहस्र लोचन प्रभृत्य शेषलेखशेखर-
प्रसून धूलिधोरणी विधूसरांघ्रिपीठभूः ।
भुजंगराज मालया निबद्धजाटजूटकः
श्रिये चिराय जायतां चकोर बंधुशेखरः ॥5॥
 
ललाट चत्वरज्वलद्धनंजयस्फुरिगभा-
निपीतपंचसायकं निमन्निलिंपनायम्‌ ।
सुधा मयुख लेखया विराजमानशेखरं
महा कपालि संपदे शिरोजयालमस्तू नः ॥6॥
 
कराल भाल पट्टिकाधगद्धगद्धगज्ज्वल-
द्धनंजया धरीकृतप्रचंडपंचसायके ।
धराधरेंद्र नंदिनी कुचाग्रचित्रपत्रक-
प्रकल्पनैकशिल्पिनि त्रिलोचने मतिर्मम ॥7॥
 
नवीन मेघ मंडली निरुद्धदुर्धरस्फुर-
त्कुहु निशीथिनीतमः प्रबंधबंधुकंधरः ।
निलिम्पनिर्झरि धरस्तनोतु कृत्ति सिंधुरः
कलानिधानबंधुरः श्रियं जगंद्धुरंधरः ॥8॥ 
 
प्रफुल्ल नील पंकज प्रपंचकालिमच्छटा-
विडंबि कंठकंध रारुचि प्रबंधकंधरम्‌
स्मरच्छिदं पुरच्छिंद भवच्छिदं मखच्छिदं
गजच्छिदांधकच्छिदं तमंतकच्छिदं भजे ॥9॥
 
अगर्वसर्वमंगला कलाकदम्बमंजरी-
रसप्रवाह माधुरी विजृंभणा मधुव्रतम्‌ ।
स्मरांतकं पुरातकं भावंतकं मखांतकं
गजांतकांधकांतकं तमंतकांतकं भजे ॥10॥
 
जयत्वदभ्रविभ्रम भ्रमद्भुजंगमस्फुर-
द्धगद्धगद्वि निर्गमत्कराल भाल हव्यवाट्-
धिमिद्धिमिद्धिमि नन्मृदंगतुंगमंगल-
ध्वनिक्रमप्रवर्तित प्रचण्ड ताण्डवः शिवः ॥11॥
 
दृषद्विचित्रतल्पयोर्भुजंग मौक्तिकमस्रजो-
र्गरिष्ठरत्नलोष्टयोः सुहृद्विपक्षपक्षयोः ।
तृणारविंदचक्षुषोः प्रजामहीमहेन्द्रयोः
समं प्रवर्तयन्मनः कदा सदाशिवं भजे ॥12॥
 
कदा निलिंपनिर्झरी निकुजकोटरे वसन्‌
विमुक्तदुर्मतिः सदा शिरःस्थमंजलिं वहन्‌।
विमुक्तलोललोचनो ललामभाललग्नकः
शिवेति मंत्रमुच्चरन्‌कदा सुखी भवाम्यहम्‌॥13॥
 
निलिम्प नाथनागरी कदम्ब मौलमल्लिका-
निगुम्फनिर्भक्षरन्म धूष्णिकामनोहरः ।
तनोतु नो मनोमुदं विनोदिनींमहनिशं
परिश्रय परं पदं तदंगजत्विषां चयः ॥14॥
 
प्रचण्ड वाडवानल प्रभाशुभप्रचारणी
महाष्टसिद्धिकामिनी जनावहूत जल्पना ।
विमुक्त वाम लोचनो विवाहकालिकध्वनिः
शिवेति मन्त्रभूषगो जगज्जयाय जायताम्‌ ॥15॥
 
इमं हि नित्यमेव मुक्तमुक्तमोत्तम स्तवं
पठन्स्मरन्‌ ब्रुवन्नरो विशुद्धमेति संततम्‌।
हरे गुरौ सुभक्तिमाशु याति नांयथा गतिं
विमोहनं हि देहना तु शंकरस्य चिंतनम ॥16॥
 
पूजाऽवसानसमये दशवक्रत्रगीतं
यः शम्भूपूजनमिदं पठति प्रदोषे ।
तस्य स्थिरां रथगजेंद्रतुरंगयुक्तां
लक्ष्मी सदैव सुमुखीं प्रददाति शम्भुः ॥17॥
 
॥ इति शिव तांडव स्तोत्रं संपूर्णम्‌॥ 


लिंगाष्टकम स्तोत्र 

ब्रह्ममुरारिसुरार्चितलिङ्गं निर्मलभासितशोभितलिङ्गम् ।
जन्मजदुःखविनाशकलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥१॥
 

देवमुनिप्रवरार्चितलिङ्गं कामदहं करुणाकरलिङ्गम् ।
रावणदर्पविनाशनलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥२॥

सर्वसुगन्धिसुलेपितलिङ्गं बुद्धिविवर्धनकारणलिङ्गम् ।
सिद्धसुरासुरवन्दितलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥३॥

कनकमहामणिभूषितलिङ्गं फणिपतिवेष्टितशोभितलिङ्गम् ।
दक्षसुयज्ञविनाशनलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥४॥

कुङ्कुमचन्दनलेपितलिङ्गं पङ्कजहारसुशोभितलिङ्गम् ।
सञ्चितपापविनाशनलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥५॥

देवगणार्चितसेवितलिङ्गं भावैर्भक्तिभिरेव च लिङ्गम् ।
दिनकरकोटिप्रभाकरलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥६॥

अष्टदलोपरिवेष्टितलिङ्गं सर्वसमुद्भवकारणलिङ्गम् ।
अष्टदरिद्रविनाशितलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥७॥

सुरगुरुसुरवरपूजितलिङ्गं सुरवनपुष्पसदार्चितलिङ्गम् ।
परात्परं परमात्मकलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥८॥


शिव स्वर्णमाला स्तुति

ईशगिरीश नरेश परेश महेश बिलेशय भूषण भो।
साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्॥

उमया दिव्य सुमङ्गल विग्रह यालिङ्गित वामाङ्ग
विभो।
साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्॥

ऊरी कुरु मामज्ञमनाथं दूरी कुरु मे दुरितं भो।
साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्॥

ॠषिवर मानस हंस चराचर जनन स्थिति लय कारण भो।
साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्॥

अन्तः करण विशुद्धिं भक्तिं च त्वयि सतीं प्रदेहि विभो।
साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्॥

करुणा वरुणा लय मयिदास उदासस्तवोचितो न हि भो।
साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्॥

जय कैलास निवास प्रमाथ गणाधीश भू सुरार्चित भो।
साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्॥

झनुतक झङ्किणु झनुतत्किट तक शब्दैर्नटसि महानट
भो।
साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्॥

धर्मस्थापन दक्ष त्र्यक्ष गुरो दक्ष यज्ञशिक्षक
भो।
साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्॥

बलमारोग्यं चायुस्त्वद्गुण रुचितं चिरं प्रदेहि
विभो।
साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्॥

शर्व देव सर्वोत्तम सर्वद दुर्वृत्त गर्वहरण
विभो।
साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्॥

भगवन् भर्ग भयापह भूत पते भूतिभूषिताङ्ग विभो।
साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्॥

षड्रिपु षडूर्मि षड्विकार हर सन्मुख षण्मुख जनक
विभो।
साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्॥

सत्यं ज्ञानमनन्तं ब्रह्मे त्येल्लक्षण लक्षित
भो।
साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्॥

हाऽहाऽहूऽहू मुख सुरगायक गीता पदान पद्य विभो।
साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्॥


चन्द्रशेखर अष्टक स्तोत्रम्

चन्द्रशेखराष्टकस्तोत्रम् ।

चन्द्रशेखर चन्द्रशेखर
चन्द्रशेखर पाहि माम् ।
चन्द्रशेखर चन्द्रशेखर
चन्द्रशेखर रक्ष माम् ॥१॥ 

रत्नसानुशरासनं रजताद्रिशृङ्गनिकेतनं
सिञ्जिनीकृतपन्नगेश्वरमच्युताननसायकम् ।
क्षिप्रदग्धपुरत्रयं त्रिदिवालयैरभिवन्दितं
चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः ॥२॥ 

पञ्चपादपपुष्पगन्धपदांबुजद्वयशोभितं
भाललोचनजातपावकदग्धमन्मथविग्रहम् ।
भस्मदिग्धकलेबरं भव नाशनं भवमव्ययं
चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः ॥३॥ 

मत्तवारणमुख्यचर्मकॄतोत्तरीयमनोहरं 
पङ्कजासनपद्मलोचनपूजितांघ्रिसरोरुहम् ।
देवसिन्धुतरङ्गसीकर सिक्तशुभ्रजटाधरं
चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः ॥४॥ 

यक्षराजसखं भगाक्षहरं भुजङ्गविभूषणं
शैलराजसुतापरिष्कृतचारुवामकलेबरम् ।
क्ष्वेडनीलगलं परश्वधधारिणं मृगधारिणं
चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः ॥५॥ 

कुण्डलीकृतकुण्डलेश्वर कुण्डलं वृषवाहनं
नारदादिमुनीश्वरस्तुतवैभवं भुवनेश्वरम् ।
अन्धकान्तकमाश्रितामरपादपं शमनान्तकं 
चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः ॥६॥ 

भेषजं भवरोगिणामखिलापदामपहारिणं
दक्षयज्ञविनाशनं त्रिगुणात्मकं त्रिविलोचनम् ।
भुक्तिमुक्तिफलप्रदं सकलाघसंघनिबर्हणं
चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः ॥७॥ 

भक्तवत्सलमर्चितं निधिक्षयं हरिदंबरं
सर्वभूतपतिं परात्परमप्रमेयमनुत्तमम् ।
सोमवारिदभूहुताशनसोमपानिलखाकृतिं
चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः ॥८॥ 

विश्वसृष्टिविधायिनं पुनरेव पालनतत्परं
संहरन्तमपि प्रपञ्चमशेषलोकनिवासिनम् ।
कीडयन्तमहर्निशं गणनाथयूथसमन्वितं
चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः ॥९॥ 

मृत्युभीतमृकण्डुसूनुकृतस्तवं शिवसन्निधौ
यत्र कुत्र च यः पठेन्न हि तस्य मृत्युभयं भवेत् ।
पूर्णमायुररोगतामखिलार्थसंपदमादरात्
चन्द्रशेखर एव तस्य ददाति मुक्तिमयत्नतः ॥१०॥ 


Shiva Stotram

Yogeshweshvaraya, Mahadevaya,Trayambakaya, Tripurantakaya,
Yogeshweshvaraya, Mahadevaya, Trayambakaya, Tripurantakaya,

Trikagni, Kalaya, Kalagnirudraya, Neelkanthaya, Mrityunjaya,
Trikagni, Kalaya, Kalagnirudraya, Neelkanthaya, Mrityunjaya,

Sarveshwaraya, Sadashivaya, Sarveshwaraya, Sadashivaya,
Sarveshwaraya, Sadashivaya, Sarveshwaraya, Sadashivaya,

Mahadevaya Namah,
Mahadevaya Namah


Gauranga

Gaurānga ardhānga gangā tarange
Yogi māhāyogaka rupa rāje gaurānga

Bhagachāla munda māla shashi bhāla karatāla
Tādeka dimidimika dimi damaru bāje

Ambarāmba gāmbhara digambara jatājuta
Phanidhāra bhujangesha anga vibhuti chāje
Vānivilāsatuya dāta vidhāta
Jāta sakala dukha sadāshiva virāje


Sri Hari Aarti

1. Jaya jaya āratī hari tumhārī,
Viṣṇu prabhu śrīnātha murārī,
Āratī hari tumhārī Jaya jaya…

2. Pītāmbara vaijayantī mālā
Mēghavarṇa bhuja nayana viśālā
Āratī hari tumhārī Jaya jaya…

3. Śrīvāsa vibhu śrīvatsa-vakṣā,
Śrīmātā śrīpati tripurārī,
Āratī hari tumhārī. Jaya jaya…

4. Śaṅkha padama gadā cakra dhārī
Śēṣavirājē garuḍa savārī
Āratī hari tumhārī Jaya jaya…

5. Kṣīra sāgara vaikuṇṭha nivāsā
Lakṣmī pakhārē caraṇa purārī
Āratī hari tumhārī Jaya jaya…

6. Jaya parabrahma jaya viśva vihārī
Śakti tumhī tumhī śambhu sanhārī
Āratī hari tumhārī Jaya jaya…

7. Jaya jagajananī jaya jagavandana
Jaya ambē jaya dēvakīnandana
Āratī hari tumhārī Jaya jaya…

8. Jaya sitē jaya rāghava jaya jaya
Jaya rādhē jaya kr̥ṣṇa jaya jaya
Jaya mā umā jaya śaṅkara jaya jaya
Jaya mā śrī jaya śrīpati jaya jaya
Āratī hari tumhārī Jaya jaya…

9. Jaya narasinha jaya vāmana jaya jaya
Jaya vaikuṇṭha jaya gōvinda jaya jaya
Jaya mōhana jaya mōhinī jaya jaya
Jaya hari śrī hari harihara jaya jaya

Āratī hari tumhārī Jaya jaya…
Śrī hari bhagavāna kī jaya! Gōvinda! Gōvinda! Gōvinda!!
Namō pārvatipatayē hara hara mahādēva!!!


Namo Namo 

Jai ho jai ho Shankara
(Bholenath Shankara)
Aadi dev Shankara
(Hey Shivay Shankara)
Tere jaap ke bina
(Bholenath Shankara)
Chale ye saans kis tarah
(Hey Shivay Shankara)

Mera karm tu hi jaane
Kya bura hai kya bhalaa…
Tere raaste pe main toh
Aankh moond ke chalaa…

Tere naam ki jot ne
Saara har liya tamas mera
(tamas: darkness)

Namo namo ji Shankara
Bholenath Shankara
Hey Triloknath Shambhu
Hey Shivay Shankara

Namo Namo ji Shankara
Bholenath Shankara
Rudradev hey Maheshvarah

Srishti ke janam se bhi
(O o…)
Pehle tera vaas tha
(O o…)
Ye jag rahe ya naa rahe
(O o…)
Rahegi teri aastha
(O o…)

Kya samay… kya pralay
Dono mein teri mahaanta
Mahaanta… mahaanta…

Seepiyon ki ontt main
(Bholenath Shankara)
Motiyaan ho jis tarah
(Hey Shivay Shankara)
Mere mann mein Shankara
(Bholenath Shankara)
Tu basa hai uss tarah
(Hey Shivay Shankara)

Mujhe bharam tha jo hai mera
Tha nahin kabhi mera…

Arth kya nirarth kya
Jo bhi hai sabhi tera…

Tere saamne hai jhuka
Mere sar pe haath rakh tera

Namo Namo ji Shankara
Bholenath Shankara
Hey Triloknath Shambhu
Hey Shivay Shankara

Namo namo ji Shankara
Bholenath Shankara
Rudradev hey Maheshvara

Chandrama lalaat pe (O o…)
Bhasm hai bhujaaon mein (O o…)
Vastra baagh chhaal ka (O o…)
Hai khadau paanv mein (O o…)

Pyaas kya ho tujhe
Ganga hai teri jataaon mein
Jataaon mein… Jataaon mein…

Doosron ke waaste
(Bholenath Shankara)
Tu sadaiv hai jiya
(Hey Shivay Shankara)
Maanga kuch kabhi nahi
(Bholenath Shankara)
Tune sirf hai diya
(Hey Shivay Shankara)

Samudra manthan ka tha samay jo aa pada
Dwand dono lok me vish-amrit pe tha chhida
Amrit sabhi main baant ke
Pyala vish ka tune khud piya

Namo Namo ji Shankara
Bholenath Shankara
Hey Triloknath Shambhu
Hey Shivay Shankara

Namo namo ji Shankara
Bholenath Shankara
Rudradev hey Maheshvara
Rudradev hey Maheshvara
Rudradev hey Maheshvara


Nirvana Shatakam

॥ निर्वाण षटकम्॥

मनो बुद्ध्यहंकारचित्तानि नाहम् न च श्रोत्र जिह्वे न च घ्राण नेत्रे
न च व्योम भूमिर् न तेजॊ न वायु: चिदानन्द रूप: शिवोऽहम् शिवॊऽहम् ॥

न च प्राण संज्ञो न वै पञ्चवायु: न वा सप्तधातुर् न वा पञ्चकोश:
न वाक्पाणिपादौ न चोपस्थपायू चिदानन्द रूप: शिवोऽहम् शिवॊऽहम् ॥

न मे द्वेष रागौ न मे लोभ मोहौ मदो नैव मे नैव मात्सर्य भाव:
न धर्मो न चार्थो न कामो ना मोक्ष: चिदानन्द रूप: शिवोऽहम् शिवॊऽहम् ॥

न पुण्यं न पापं न सौख्यं न दु:खम् न मन्त्रो न तीर्थं न वेदा: न यज्ञा:
अहं भोजनं नैव भोज्यं न भोक्ता चिदानन्द रूप: शिवोऽहम् शिवॊऽहम् ॥

न मृत्युर् न शंका न मे जातिभेद: पिता नैव मे नैव माता न जन्म
न बन्धुर् न मित्रं गुरुर्नैव शिष्य: चिदानन्द रूप: शिवोऽहम् शिवॊऽहम् ॥

अहं निर्विकल्पॊ निराकार रूपॊ विभुत्वाच्च सर्वत्र सर्वेन्द्रियाणाम्
न चासंगतं नैव मुक्तिर् न मेय: चिदानन्द रूप: शिवोऽहम् शिवॊऽहम् ॥


मेरा भोला है भंडारी

मेरा भोला है भंडारी, करे नंदी की सवारी,
भोले/शँभू नाथ रे, शँकर नाथ रे ll
तेरा नाम है तारणहारा, एक तूँ ही है पालनहारा,
भोले नाथ रे, शंकर नाथ रे l
मेरे साथ रे, तूँ मेरे साथ रे l

तमाम सृष्टि का सार तूँ है, विकार तूँ निर्विकार तूँ है,
कहूँ क्या वारे मैं भोले तेरे, ‘असीम तूँ है आपार तूँ है’ l
ज़ुबान पे शँभू है वास तेरा, निगाह में भी निवास तेरा,
समाए दिल में है तेरी सूरत, ‘वज़ूद मुझमे है ख़ास तेरा’ l

गंगा सोहे जिसके केशा, करता मँगल जो हमेशा,
भोले नाथ रे, शँकर नाथ रे l
तूँ ही त्रिपुरारी कैलाशी, तूँ ही दुःख भंजन अविनाशी,
शँभू नाथ रे, शँकर नाथ रे l
मेरा भोला है भंडारी, जिसे पूजे दुनियाँ सारी,
भोले/शँभू नाथ रे, शँकर नाथ रे ll
मेरे साथ रे, तूँ मेरे साथ रे l

उदासिओं को मिटा दिया है, चिराग दिल में जला दिया है,
हमेशा से भोले नाथ तूने, ‘सुख का रस्ता दिखा दिया है’ l
नहीं है कोई सिवाए तेरे, बने हैं हम तो बनाए तेरे,
अगम भी तूँ है सुगम भी तूँ है, ‘है खेल यह सब रचाए तेरे’ l

पीकर खुद ही विष का प्याला, दुनियाँ को अमृत दे डाला,
भोले नाथ रे, शँकर नाथ रे l
कुल  सृष्टि का चक्र चलाए, बिन गौरां आधा कहलाए,
शँभू नाथ रे, शँकर नाथ रे l
मेरा भोला है भंडारी, करे नंदी की सवारी,
भोले/शँभू नाथ रे, शँकर नाथ रे ll
मेरे साथ रे, तूँ मेरे साथ रे l

नमामि परमेश्वराय शँकर, नमामि सर्वेश्वराय शँकर,
नमामि योगेश्वराय शँकर, ‘नमामि भुवनेश्वराय शँकर’ l
मेरा भोला है भंडारी, करे नंदी की सवारी,
भोले/शँभू नाथ रे, शँकर नाथ रे ll
मेरे साथ रे, तूँ मेरे साथ रे ll


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