नंदू को आज अपना प्रोजेक्ट स्कूल में submit करवाना था । आज project submission कि last date थी । नंदू इसी चक्कर में Project की information कलेक्ट करने के लिए दो तीन दिन से रोज Internet Cafe जा रहा था । आज भी नंदू का Internet surffing चल रहा था तभी उसको एक बहुत हि सुंदर भक्ती कविता internet पर पढने को मिली । उसे पढते पढते उसके अष्टभाव जाग्रीत हो गये । उसका अंतःकरण भर आया । आंखों से अश्रूं की धाराएं बहने लगी । उसने उस कविताकार का profile search किया और उनकी लिखी बाकी कविताएं भी पढ़ने लगा । पढ़ते पढ़ते उसे गहरी निंद आने लगी । किंतु नंदू बार बार आंखों पर पानी मारकर नींद से उठता और कविता पढ़ता । वह उन कविताओं का और कविताकार का fan बन गया । उसने कविताकार से संपर्क किया । उनकी स्तुती की । उनका शिष्य बनने की ईच्छा प्रकट की । कविताकार ने रीप्लाय किया , “you can call me didi” . यह सुनकर नंदू आनंदित हो गया । उसे एक online मनू दिदि मिल गयी । नंदू मनू दिदि से inspire होकर खुद भी कविता करने लगा । वह अपनी मनू दिदि से बहुत स्नेह करता । किंतु मनू दिदि अपने हि काम में व्यस्त रहती । उसने कभी नंदू की project में मदत नहिं कि । पिछली रक्षाबंधन पर नंदू ने मनू दिदि को Happy RakshaBandhan का मेसेज किया । किंतू मनू दिदि का कोई रीप्लाय नहिं आया । इस बार नंदू ने अपने हाथों से राखी तैयार कि और वो प्रतिक्षा में है की मनू दिदि आयेगी और अपने हाथों से ये राखी मुझे बांधेगी । मेरी प्यारी मनू दिदि ! अब बिचारे नंदू को कौन समझाएं उसके मनू दिदि का अकाउंट तो Ban कर दिया है । और वो जेल की हवा खा रहि है । वो चाहकर भी नंदू से contact नहिं कर सकती ।