Jai Shri Radhey Shyam!

I offer my obeisance to the divine in you.

तेरा रूप कहूं कहां तक
है ये ऐसा जो देखा ना था अब तक

प्रियतम तेरी आंखें है सहारा हमारा
सहारा डूबते को तिनके का
देखता हूं तेरी आंखों में तो भूल जाता हूं
भूल जाता हूं अपने आप को

चला तो था अपने आप को जानने
लेकिन ना जाने कहां कैसे
कैसे मैं अपने आप को भूल गया

भूल गया चला कहां था
हो ही क्यूं ना तुमने जो पकड़ लिया
हां तुमने ही पकड़ा लिया

कहता हूं जोर से मैंने पकड़ा नहीं था तुम्हें
शायद कभी छोड़ा ही नहीं था तुम्हें
छोड़ता कैसे जब तुम बिन कोई है ही नहीं

है ही नहीं प्रियतम कोई है ही नहीं
कैसे मान लूं कि तू मेरा नहीं
मेरा नहीं तू तो कौन है मेरा

आज तू बता दे कि कौन है मेरा
बता दे प्रियतम बता दे
एक बार आ कर बता दे

ये दासी तुझे पुकार रही है प्रियतम
बस एक झलक दिखा दे
मुझे निज दासी बना दे

तेरा रूप कहूं कहां तक
है ये ऐसा जो देखा ना था अब तक

 

Sorry if I hurt someone’s feelings.

Jai Shri Radhey Shyam!

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Abhishek Sharma

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