Sorry for my Hindi….if someone wants Hinglish or a pure English translation, I may try….These lines took me exactly 7 minutes to write during the 2014’s Chaitra Navratri and were typed with shivering hands and took it me 7 years to walk through all the stanzas and be ready for the final battle..

माँ मैं ना चाहुं तेरा आशिष, ना मुझे कोई वर दे,
क्या करूँ, क्युं रहूँ इस नश्वर शरीर घर संसार में,
तु तो माँ बस अपनी चरण दे| मुझे अपनी शरण ले|

माँ मैं क्युं खोजुं तुझे मंदिर की मुरत में, कागज पर उकेरे चित्रो में
क्युं और कब तक ये लेन देन का व्यापार करूँ हमारे बनाये चरित्रों में
तु तो माँ बस अपनी चरण दे| मुझे अपनी शरण ले|

बाँध रखा है जो मैंने, अपने को इस शरीर से हर जन्म अलग अलग बंधन में,
क्युं मुझसे रहती हो अलग, बुलाऊँ कभी नामजाप, व्रत, तीरथ, मैं चाहुँ तुझे हर स्पंदन में,
तु तो माँ बस अपनी चरण दे| मुझे अपनी शरण ले|

देना है तो ऐसा मेरे पुण्यों का वर दे, मेरे पापों का श्राप दे
अब मुझे मुक्त कर, ना चाहुं कि मेरा निर्वाण कर,
मेरा रोम रोम हिल जाने दे, मुझे सब में मिल जाने दे,
मुझमें सदगुण बढ जाने दे, मेरा दुर्गुण नष्ट कर्,
मुझसे मेरे ‘मैं’ को नष्ट कर, छोडु ना तेरी चरण, तेरी शरण
तेरे बनाये इस फल से, बना मुझे नया वृक्ष बरगद
तेरा सब कुछ सबपे लुटाउं, गिरु तो दुर्जनों में हो भगद्ड

तेरा ही तुझ पर अर्पण,
तेरा ही तुझ पर अर्पण।
तु तो माँ बस अपनी चरण दे,
मुझे अपनी शरण ले।

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Sumit Verma

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