Sastang Dandavat at your lotus feet Swamiji. The following essay won me (rather you) the award as mentioned by me in the previous post. May be youngsters will be finding something useful for their preparation.

 

स्वतंत्र भारत का 75 वाँ साल : सत्यनिष्ठा के साथ आत्मनिर्भरता

उपक्रमणिका:

 

इस वर्ष, सन 2021 में स्वर्णिम भारत अपनी स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ मना रहा है । इस शुभ अवसर को भारत सरकार ’आजादी का अमृत महोत्सव’ के तौर पर मना रही है। आजादी के 75 साल का ये जश्न 12 मार्च 2021 से शुरू हो चुका है जो 75 सप्ताह तक चलेगा। 15 अगस्त 2023, 78वें स्वतंत्रता दिवस पर अमृत महोत्सव का समापन होगा। इस दौरान भारत सरकार व राज्य सरकारों द्वारा देशवासियों की जनभागिदारी से अलग-अलग आयोजन किये जाएंगे। इसी कार्यक्रम के अंतर्गत सतर्कता जागरूकता सप्ताह का पालन 26 अक्टूबर से 1 नवंबर 2021 तक किया जा रहा है। इस वर्ष का प्रसंग है : “स्वतंत्र भारत का 75 वाँ साल : सत्यनिष्ठा के साथ आत्मनिर्भरता”। पहले स्वतंत्र भारत की चुनौतियों का एक संक्षिप्त विस्लेषण करते हैं।

 

स्वतंत्र भारत की चुनौतियां:

 

संकीर्णता, स्वार्थ, राजनीतिक विसंगतियों, आर्थिक अपराधों, शोषण, भ्रष्टाचार एवं जटिल सरकारी प्रक्रियाओं ने अनंत संभावनाओं एवं आजादी के वास्तविक अर्थों को धुंधला कर रखा है ।आजाद भारत अंग्रेजों की गुलामी के जंजीरों से मुक्त तो हो गया, लेकिन सही मायने में आजादी अभी भी दूर है । बहुत सरे सपने अभी भी अधूरे हैं जैसे की  पिछड़े वर्गों का उत्थान तथा उन्हें शोषण से बचाना, दारिद्र्य सिमा रेखा के निचे अभी भी दवे हुए जनसमुदाय का उत्थान, शिक्ष्या व स्वास्थ्य सेवा के स्तर में उन्नति, महिला शशक्तिकरण, मानव संसाधन का सदुपयोग, डिजिटल डिवाइड की बाधा का निवारण , ग्रामोत्थान, आधारभूत संरचना का त्वरित विकास, सांप्रदायिक सौहार्द्र का विकास इत्यादि

 

लेकिन, सबसे बड़ी जो चुनौती स्वतंत्र भारत के सामने है, वह है आत्मनिर्भर बनना । हाल ही में COVID-19 महामारी के चलते हमें यह एहसास हुआ है की आत्मनिर्भरता किसी भी राष्ट्र के विकास-पथ पर कितनी बड़ी कड़ी होती है । हमारे माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने इस विषय पर बल देते हुए “आत्मनिर्भर भारत , शशक्त भारत ” का नारा लगाया । अपने पड़ोसी देशों के हमारे प्रति आक्रामक रवैया के चलते भारत को हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना अत्यंत जरुरी है, नहींतो भारत के सम्प्रभुता के ऊपर सवाल  उठने की नौबत आ जायगी ।

 

 

आत्मनिर्भरता की परिभाषा:

 

सही मायनों में क्या होती है आत्मनिर्भरता ? अगर हम स्वतंत्र हैं तोह क्या आत्मनिर्भर हैं ? जरुरी नहीं की हर स्वतंत्र राष्ट्र आत्मनिर्भर हो, लेकिन हर आत्मनिर्भर राष्ट्र स्वतंत्र है । इतिहास के पन्नों से लेकर आधुनिक पृथ्वी में इस कथन के पक्ष्य में  अनगिनत दृश्टान्त मिलेंगे । जिस सभ्यता ने आत्मनिर्भरता खोया, वह इतिहास के पन्नों में विलीन हो गया। 

आत्मनिर्भरता की परिभाषा क्या है ? सरल शब्दों में बयान किया जाये तोह, राष्ट्र निर्माण व सतत प्रगति के लिए आवश्यक सेवाओं  तथा सामग्रीओं  के लिए दूसरों पर निर्भर न करना ही आत्मनिर्भरता है । हालाँकि वर्त्तमान के समय में कोई भी राष्ट्र दूसरे राष्ट्र के साथ आपसी सहयोग के बिना प्रगति पथ पर अग्रसर होना लगभग नामुमकिन है । लेकिन इसका यह कटाई मतलब नहीं बनता है की एक राष्ट्र दूसरे राष्ट्र के शरणागत हो जाए और उसका मोहताज बन जाए । 

हमारे राष्ट्र पिता महात्मा गाँधी ने  भारतवासिओं को स्वावलम्बी बनने के आह्वान दिया था । जो राष्ट्र खुद अपनी पैरों पर खड़ा न हो सकेगा, वह विकास के रह पर कैसे चलेगा ? स्वतंत्रता के समय भारत अपनी जनता को दो वक्त की रोटी मुहैया करवाने के लिए दूसरे राष्ट्रों पर निर्भर कर रहा था, हरित क्रांति के बाद ही भारत खाद्य पदार्थ उत्पादन में स्वाबलम्ब बना । जो राष्ट्र आत्मनिर्भर नहीं है, वह अपनी सिमा तथा सम्प्रभुता की सुरक्षा कैसे कर सकता है ?

आत्मनिर्भरता की पहल राष्ट्र के नागरिकों से ही सुरु होती है। अपने रोजमर्रा के कार्यों में दूसरों पर निर्भर न रहते हुए हमें यह सोचना चाहिए की हम खुद क्या कर सकते हैं और राष्ट्र को क्या दे सकते हैं । जब व्यक्ति स्वाबलम्ब बनेगा तोह उसका परिवार स्वाबलम्ब बनेगा । स्वाबलम्ब परिवार, स्वाबलम्ब समाज की इकाई है । स्वाबलम्ब समाज स्वाबलम्ब राष्ट्र निर्माण का महत्वपूर्ण हिस्सा है ।

 

सत्यनिष्ठा की परिभाषा:

 

सत्यनिष्ठा के अंग्रेजी पर्याय integrity का तात्पर्य किसी चीज के सम्पूर्ण रूप से जुड़े होने ओर आंतरिक सुसंगति से हैं । सत्यनिष्ठा के अंतर्गत नैतिक सिद्धांतों के बीच में आंतरिक सुसंगति और नैतिक सिद्धांतों तथा व्यवहार में सुसंगति दोनों आते हैं। सत्यनिष्ठा सम्पन्न व्यक्ति का आचरण लगभग हर स्थिति में उसके नैतिक सिद्धांत के अनुरूप होता है और नैतिक सिद्धांत वस्तुनिष्ठ आधार पर नैतिक होता है । मनुष्य के अंतरात्मा की सोच और उसके आचरण में विसंगति नहीं होनी चाहिए जो की एक सत्यनिष्ठ व्यक्ति का परिचायक है ।

सुसबद्धता में निहित है कि नैतिक सिद्धांतों का अधिक्रम या सोपान क्रम भी सुनिश्चित होना चाहिए ताकि अगर दो सिद्धांतों का टकराव हो तो भी कर्ता को इस बात का संशय न हो कि उसे किस सिद्धांत को वरीयता देनी हैं। अगर किसी नैतिक सिद्धांत से विचलन होता है तो उस विचलन को न्यायसंगत ठहराने के लिए पर्याप्त आधार होना चाहिए ।

सत्यनिष्ठा बहुत व्यापक शब्द है इसे और अधिक सुपरिभाषित करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों के अनुसार देखा जा सकता हैं जैसे

1.     बौद्धिक सत्यनिष्ठा (Intellectual integrity)

2.     व्यक्तिगत सत्यनिष्ठा (Personal integrity)

3.     व्यावसायिक सत्यनिष्ठा (बिज़नेस / Professional integrity)

 

आमतौर पर हम सत्यनिष्ठा का प्रयोग सच्चाई के लिए ही करते हैं । जो इन्सान जीवन में सत्य के पथ पर अग्रसर होता हैं उसे कभी बड़ी पराजय का सामना नहीं करना पड़ता हैं ।

 

सत्यनिष्ठा; आत्मनिर्भरता का आधार:

ईमानदारी से किया गया हर प्रयास को पूरी कायनात सम्मान देती है । सच्चे मन से किये गए कार्य कभी विफल नहीं होते हैं । एक ईमानदार छात्र अपने जीवन में बड़ा लक्ष्य हासिल कर सकता है । एक ईमानदार किसान अपनी मेहनत से उपज बढ़ा सकता है । एक सत्यनिष्ठ बैज्ञानिक अपने शोध कार्य में बाधाएं तोह झेल सकता है लेकिन अंत में वह समाज को बहुमूल्य ज्ञान का आलोक भी प्रदान करता है । एक सत्यनिष्ठ कर्मचारी (चाहे निजी या सरकारी क्षेत्र के) रूप से अपना कार्य कर देश के विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है ।

सत्यनिष्ठ व्यक्ति सांप्रदायिक सद्भाव तथा आपसी तालमेल बनाये रखने में विश्वास रखता है । इससे आपसी भाईचारा बढ़ेगा और अपने विविधताओं में भी सबको एकजुट होकर काम करने में आसानी होगी ।

हमारे माननीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी जी ने आत्मनिर्भर भारत के सन्दर्भ में मेक इन इंडिया, वोकल फॉर लोकल का नारा लगाया है । इसका मानदंड ईमानदारी व सत्यनिष्ठा पर निर्भर करता है । जब तक हम गुणवत्ता के साथ बिना किसी समझौते के सासत्यनिष्ठ होकर अपना काम नहीं करेंगे, तबतक हमे दूसरों पर निर्भर रहना पड़ेगा, क्योंकि हमारे उत्पाद उच्च कोटि के नहीं हो सकते हैं ।

सच्चाई और ईमानदारी से भ्रष्टाचार में कमी आएगी । देश का धन काला धन नहीं बनेगा जिससे की देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए बहुत सारि परियोजनाओं के लिए पूंजी उपलब्ध होगी ।

आत्मनिर्भरता सत्यनिष्ठ व्यक्ति के आभूषण होता है जिसे धारण कर वह अपने जीवन के हर क्षेत्र में सतत प्रगति करता रहता है ।

 

निष्कर्ष:

आत्मनिर्भरता समय की मांग है और सत्यनिष्ठा, व्यक्ति के चरित्र । सत्यनिष्ठा के बिना जीवन में कुछ करने तथा राष्ट्र पर मरमिटने की चाह पूर्ण तरह से विकसित नहीं हो सकती है । जबतक नागरिक के अंतरात्मा में सच्चाई और ईमानदारी भरा देशप्रेम की ज्वाला उत्पन्न नहीं होती है, तबतक वह खुदकी तथा राष्ट्र की आत्मनिर्भरता के बारे में ध्यान नहीं दे सकता है । अतः आजादी का इस अमृत महोत्सव के अवसर पर हम सब भारतवासी यह प्रण लें की एक सत्यनिष्ठ जीवन व्यतीत करने का पूरा प्रयास करेंगे और गर्व के साथ आत्मनिर्भर बनेंगे ।

जय हिन्द !

Jai Shri Hari and wish you all Happy Diwali with the urge to cause minimum pollution and maximum spreading of joy 😊😊😊

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Biswa Nanda

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