Os.me family को सुबह की प्यारी-प्यारी और ताजी-ताजी नमस्ते🙏

श्री मात्रे नम:

हे माँ! तुम्हें और तुम्हारे अनगिनत भक्तों इन पावन नौ दिनों के खूब-खूब शुभकामनाएं🕉🌹🎉🕉

सहस्रनामों में से आरम्भ के कुछ नामों का जप आरम्भ करते समय मन में कुछ विचार आये। मैंने देख लिये। सोचा, इन पर बाद में विस्तार से कुछ लिखूंगा। विचार कुछ ये थे- “माता आपकी आराधना और वंदना के लिये मेरे पास आज ही का समय है। कल का किसे पता! यूँ तो मुझे कुछ नहीं चाहिए, पर तुम देना अवश्य देना, वह देना जो मेरे लिये आवश्यक हो और मुझे तुमसे दूर न करे। और मेरी गिरगिट जैसी स्वभाव बदलने वाली प्रवृत्ति को अगले जन्म में बिलकुल भी मत देना।” क्योंकि मन ने कल ही मुझे स्वभाव बदलकर बदलकर सैकड़ों फिजूल के कामों में उलझा कर रखा। इसीलिये

श्रीमाता, श्रीमहाराज्ञी, श्रीमत सिंहासनेश्वरी, चित्त की अग्नि से प्रकट हुयीं, देवताओं के कार्य पूर्ण करने वाली, सहस्रों सूर्यों के प्रकाश के समान आभा वाली, चार भुजाओं में राग रूपी पाश, क्रोध रूपी अंकुश, मन रूपी धनुष और पाँच तन्मात्राओं रूपी बाणों को धारण करने वाली और स्वयं की अरूण आभा से समस्त ब्रह्मांड को ऊर्जा और प्रकाश देने वाली माँ, क्या मेरी इतनी छोटी सी बात नहीं मानेंगी क्या? 

और माँ! अपने सहस्रनाम के जप के लिये कल भी मुझे प्रेरित करना, जगाना। आपके प्रत्यक्ष चरणों में सिर झुकाने के लिये तत्पर..

आपका

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Amit

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