ज़िन्दगी सिखा जाती है सबको तरीके जीने के,
कुछ लोग पा जाते हैं सीख सुख और आनंद के,
तो  कुछ उठाते हैं भोज उदासी के|

ग़म में डूबे हुए लोगों में रहती है अभिलाषा,
लेकर मन में एक ही आशा,
की दूर हो जाए ज़िन्दगी की सारी निराशा|

लेकिन सबके होते नहीं ऐसे नसीब,
होकर ख़ुशी के बहुत ही करीब,
लोग फिर भी हो जाते हैं बदनसीब|

होता नहीं हमेशा वोह जिसका हो इंतज़ार,
खाके ठोकर बार-बार,
हाथ आती है तो कमबख़्त केवल हार|

होकर ज़िन्दगी से निराश,
सोचने लगते हैं लोग की काश..
छू पाता मैं भी आकाश|

विषाद में उठाए हुए फैसले,
अक्सर गिरा देते हैं लोगों के हौसले,
और छूट जाते हैं सिर्फ बिगड़े हुए मसले|

सब अपनाते हैं अपने-अपने हत्यार,
कुछ चुनते हैं रास्ते जिनमे हो प्यार,
तो कुछ उठाते हैं हाथों में तलवार|

फिर होते है फैसले सही और गलत के,
अचाई को इनाम दे,
और बुराई को चढ़ा सूली पे|

समझ न आती सबको  ज़िन्दगी की ये चाल,
और घुट घुट कर जीते हैं हम बेहाल,
हर घंटा हर दिन हर साल|

कोई नहीं देखता की है यह खेल ज़िन्दगी के,
हालात बनाती है ऐसे ये,
की न जी पाए हम अपनी शर्तों पे|
नचा रही है हम सबको अपने इशारों पे,
और बनकर रह जाते हैं हम सिर्फ एक कठपुतली ज़िन्दगी के|

#TheWriteChoice

PC: Photo by Min Thein from Pexels

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Durga

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