Hello honourable people, First I was unaware of the poems category available or not here. But when I saw today, it is, I made my mind to publish one of my poem here. So here goes my first poem. This poem is in Hindi language, I usually writes in Hindi.

खोजना होगा तो खोज ही लूंगा

खोजना होगा तो खोज ही लूंगा,
चाहे कितनी परतों में छिपा हो,
कोई मेरा, या सबका वह।
चलना होगा तो चल ही लूंगा,
चाहे कितने ही पत्थर वजह,
बनें मेरे रक्त के बहने की।
देखना होगा तो देख ही लूंगा,
चाहे प्रकाश विलीन हो जाए कहीं,
और तम का ही हो क्षितिज।
जानना होगा तो जान ही लूंगा,
चाहे दोहराव करना पड़े जीवन का।
और मिलना होगा, तो ये भी होगा,
चाहें मिलें किसी दूसरे ब्रह्मांड में।

आप सभी पाठकों को पढ़ने के लिये धन्यवाद।

अपने विचार, सुझाव आदि बताएं, मुझे जानकर खुशी होगी धन्यवाद।

आपका दिन शुभ हो।

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Amit

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