प्रल्हाद की भक्ती में
तुम हो 💕

मीरा के भजन में
तुम हो 💕

पुंडलिक की सेवा में
तुम हो 💕

चैतन्य के अश्रू में
तुम हो 💕

वे़णाबाई के गीतो में
तुम हो 💕

बुध्द के सत्संग में
तुम हो 💕

नानक के ओंकार में
तुम हो 💕

कृष्ण की भगवद्गीता में
तुम हो 💕

जनी के नामस्मरण में
तुम हो 💕

सखु के अंतर मन में
तुम हो 💕

महावीर के निर्वाण में
तुम हो 💕

रविदास के पदो में
तुम हो 💕

कान्होपात्रा की आर्तता में
तुम हो 💕

कबीर के दोहों में
तुम हो 💕

मुक्ताबाई के चरीत्र में
तुम हो 💕

एकनाथ के भागवत में
तुम हो 💕

रामदास के करूणाष्टक में
तुम हो 💕

ज्ञानेश्वर की अमृत वाणी में
तुम हो 💕

तुकाराम की गाथा में
तुम हो 💕

तुलसीदास के रामायण में
तुम हो 💕

नामदेव के अभंग में
तुम हो 💕

बहिणाबाई की रचना में
तुम हो 💕

गोरोबा की आरती में
तुम हो 💕

निवृत्तीनाथ के हरीपाठ में
तुम हो 💕

तुकडोजीं के श्लोक में
तुम हो 💕

अमृता की कविता में
तुम हो 💕

– अमृता विनायक सोनवणे

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Amruta

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