अब जब हाथ थाम ही लिया है तो डर किस बात का।

सोचा था कहीं पहुंचकर जिंदगी शुरू करूंगी। 

कुछ हासिल कर सामने आऊंगी।

पर क्या फर्क पड़ता है उससे,

की अब बोलूं या फिर तब।

और क्या बनने और कहा पहुंचकर ,

जीने कि बात कर रही थी मै।

मुझे खुद भी कोई अंदेशा नहीं था जिसका।

और तब ध्यान आया,की उसका क्या 

जो मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि है। 

खुद स्वामीजी।💕

जब उन्होंने मेरी जिंदगी में आने के समय नहीं सोचा,

की कौन है, कहा है, किस हाल मे है, क्या है 

बस मुझे अपना बना लिया,

तो फिर मै क्यों सोचूं।

वैसे भी जिंदगी एक सफ़र है, कोई पड़ाव नहीं।

ना बीता हुआ कल, ना आने वाला कल 

ये तो बस आज मे है, अभी मे है।

और फिर किसे क्या बनकर दिखाना है,

जब उनसे कुछ छिपा ही नहीं।

जो अपना ही घर है, 

और जहां अपने ही लोग है।

मै क्या अच्छी और क्या बुरी,

क्या कम और ज्यादा।

बस उनकी राह पर चलने की मेरी, 

ये एक छोटी सी शुरुआत है। 

स्वामी ❤️🙏😊

धन्यवाद।🙏

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Abha

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