पार्सल —‘मेरे नाम के——–
वह भी दो-दो—- सुनकर मुझे बहुत आश्चर्य हुआ।
जब रणवीर जी (आश्रम के सेवादार) ने मुझसे कहा कि दीदी आपके पार्सल आए हैं। मैंने उनसे बोला कि मैंने तो कुछ मंगवाया ही नहीं, इसलिए यह मेरे नहीं हो सकते। परंतु —उन पर मेरा नाम था इसलिए मुझे लेने ही पड़े।
शाम तक मैंने उनको ऐसे ही रखा रहने दिया ।परंतु एक संदेश( मैसेज) आने पर मैंने पार्सल खोला।ओह—– यह तो वह पार्सल नहीं था)।
एक ड़िब्बा खोला उसमें टॉफियां🍖🍖 पार्सल 🎁🎁 2दूसरा डिब्बा खोला उसमें भी टॉफियां 🍬🍬।पार्सल 🎁🎁 3
मुझे समझ नहीं आ रहा था कि इतनी टॉफियां मेरे लिए किसने भेजी है । कुछ ही देर बाद एक फोन ने मेरी दुविधा दूर कर दी।
पता है ——वह टॉफियां मेरे लिए किसने भेजी थी? कनाडा से उर्जा बेटी ने ।😍पार्सल 🎁🎁 4
मैं उन टाॅफियों को देखकर इतना भावुक हो गई कि मेरे पास शब्द नहीं है अपनी भावना को प्रकट करने के लिए😍 ।
बार-बार एक ही विचार दस्तक दे रहा था कि सिर्फ एक मुलाकात में इतना प्रेम वही कर सकता है जिसमें प्रेम लबालब भरा हो। जो प्रेम से सराबोर हो ।
शायद –🤔ऐसे ही रिश्तो को दिल के रिश्ते कहा जाता है क्योकि ऐसे रिश्तो में कोई स्वार्थ नहीं होता ।
।।जय श्री हरि।।🙏🙏