बालक का मधुर हास्य है प्रेम

सागर कि लेहरों की गुंज है प्रेम

सुरज की पेहली किरण है प्रेम

पक्षियों की चहचहाट है प्रेम

चुडियों की खनखनाट है प्रेम

कोयल कि कुहू कुहू है प्रेम

नारी की शालिनता है प्रेम

नवयुवती की लज्जा है प्रेम

कलीयों का खिलना है प्रेम

बारीश की पेहली बूंदे है प्रेम

दिल से निकली दुवा है प्रेम

पायल की झनझनाट है प्रेम

किसान के घर की रोटि है प्रेम

गांव के मिट्टी कि खुशबू है प्रेम

मां का मधुर सहवास है प्रेम

मदमस्त हवा का झोंका है प्रेम

होठों कि मुस्कुराहट है प्रेम

चरणों में समर्पित पुष्प है प्रेम

तुझ में है प्रेम

मुझ में है प्रेम

सब के मन में है प्रेम

अत्र तत्र सर्वत्र है प्रेम

 

~ अमृता 💕

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