यह वीरान है,
यह शमशान है.

यात्रा का गंतव्य है शमशान,
विचारों का अंत है शमशान.

शिव का शमशान मे वास है,
तभी योगी को शमशान की प्यास है.

शमशान की राख से ही है, ईश्वर की प्रतिमा निर्मित,
शमशान अग्नि ही करती है, अहम् को सीमित.

शमशान नहीं कोई प्रयास,
समर्पण ही है शमशान की आश.

शमशान से ही है तृप्ति योगी की,
शमशान है चिता की राख भोगी की.

शमशान मे ही होते है अहम् के अंतिम हस्ताक्षर,
शमशान में ही होता सत्य उजागर.

योगी की कल्पनाओं की अर्थी है शमशान,
ध्यान की रणभूमि का सारथी है शमशान.

शमशान जैसे लक्ष्य को भेदता कोई तीर कमान,
शमशान अंत है महाभारत का महान.

शमशान जैसा सन्नाटा जहाँ है,
ध्यान का अंकुर फूटता वहां है.

शमशान के गर्भ से ही होता बुद्धत्व का जन्म,
शमशान ही है अध्यात्म का मर्म.

शमशान जैसे खोजी खोजे अपनी धुरी,
शमशान में ही होती है खोज पूरी.

गुरु है जैसे शमशान दावानल,
शिष्य जैसे मृत देह जलती पल पल.

शमशान भीतर का द्वार है,
शमशान धर्म का सार है.

शमशान जैसा मन हो मौन,
तो उस भूमि में फिर बचता कौन.

योगी शिव के लिए तड़पता तड़पता गुमनाम हो गया,
व्यक्तित्व, अस्तित्व में खोने से शमशान हो गया.

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