★-सोचती हूं(. ❛ ᴗ ❛.)

सोचती हूं….

एक दिन  तो ऐसा आएगा, जब मैं सच में मन से मुस्कुराऊंगी,

बेखबर सी होकर मैं, जिंदगी के सारे ग़म भूल जाऊंगी,

सोचती हूं…

एक दिन तो ऐसा आएगा, जब मैं खुद को खुद से मिलवाऊंगी,

ओढ़ रखी है चादर जो दिखावे की, उसको हमेशा के लिए उतारूंगी,

सोचती हूं…

एक दिन तो ऐसा आएगा, जब मैं खुद की पहचान बनाऊंगी,

पीछे छोड़ सब दुनियादारी , मैं झंडा बन लहराऊंगी,

सोचती हूं…

एक दिन तो ऐसा आएगा, जब मैं बन परिंदा आसमान में उड़ जाऊंगी, 

तोड़कर सब जंजीरें, मैं ख्वाबों के पंख लगाऊंगी,

सोचती हूं…

एक दिन तो ऐसा आएगा ,जब मैं जीवन में संतुष्टि पाऊंगी,

भूल कर सब ग़म और ख्वाहिशें, मैं चिंता मुक्त हो जाऊंगी….

मैं चिंता मुक्त हो जाऊंगी

★-सोचती हूं(. ❛ ᴗ ❛. ) 1

 

Shivani Puri..

आशा करती हूं कि आप सब को मेरे भाव जो कि इस कविता के माध्यम से प्रकट किए गए हैं पसंद आएंगे….

आप सब का बहुत बहुत शुक्रिया कि आप सब मेरी कविताएं पढ़ रहे हैं… यह मेरे लिए बहुत खुशी की बात है कि मेरी कविताएं किसी को पसंद आ रहीं हैं……. ंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंं

मैं कविताएं किसी कारणवश नहीं लिखती ,बस मन की भावनाएं कभी-कभी व्यक्त करने के लिए शब्द ही ऐसे माध्यम बन जाते हैं ,जिससे हम खुद की भावनाओं को बता पाते हैं….

ऐसे ही कभी-कभी मन में कुछ पंक्तियां आ जाती हैं , जिसे मैं लिख देती हूं और आप सबके साथ सांझा कर देती हूं….

मैं एक छात्रा हूं और मैं केवल 20 वर्ष की हूं, मुझे लिखने का इतना अनुभव भी नहीं है और मैं कुछ 2 साल से ही लिख रही हूं , वह भी जो मन में आता है उसे लिखकर अपने भाव प्रकट कर देती हूं ..…

  • इसलिए आप सब यही समझे कि मैं अभी सीख रही हूं, मुझे लिखने की कला नहीं आती, मैं बस अपने मन की बात को एक कविता के रूप में लिख देती हूं, यदि आप लोगों को मेरी कविताएं अच्छी लगती हो या आप उनमें कोई सुधार बताना चाहते हो तो आपका बहुत बहुत आभार है…….. मेरी गलतियों को बताएं ताकि मैं अपनी गलतियों को सुधार सकूं….🙇‍♀️🙇‍♀️

मैं आशा करती हूं कि इस माध्यम से मैं और भी नयी बातें सीखूं और  लिखने की कला भी सीखूं…🙏🙏

मुझे आप सभी के सहयोग की बहुत ज़रूरत है 🙏🙏

कृपया मुझे सहयोग दें….

आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद 🙏🙏

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Gorvi Sharma

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