प्रस्तुत लेख प्रशंसा और निंदा के करामाती प्रभावों से परिचित कराती है, इसमें मानसिक जोखिम की संभावना है क्यों कि लेख पढ़ने के उपरान्त ,आप को आनंद के तलाश की तलब हो सकती है😁 इस क्रम में आप निंदा रस का पान भी करने की सोच सकते हैं। इसलिए अपने जोखिम में इस पोस्ट का आनंद लें।

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सृष्टि के आरंभ से ही मानव बड़ा खोजी रहा है ,किसी ईश्वर या सत्य की खोज में नहीं, ‘आनंद की खोज में ‘😁😁। आनंद शब्द के उच्चारण में एक अनुस्वारिक आंदोलन होता है ,जिससे मन स्थिर सा हो जाता है । भारत में आनंद खोजने की प्रथा का प्रचलन बहुत पुराना है, जंगलों में रहने वाले आदिवासी जैसे आनंद के लिए ताड़ी खोज लेते हैं या नगरों में रहने वाले कुलीन वर्ग अपना सोमरस ढूंढ लेते हैं । उसी तरह सच्चा आनंद मार्गी अपना ठेका ढूंढ ही लेता है, आनंद प्राप्त करने के इन बाहरी उपक्रमों से अलग हमें दो स्थितियों और दो भावों में बड़ा आनंद आता है, पहला है ‘प्रशंसा’ और दूसरा ‘निंदा’😁😁। कोई अध्ययन नहीं ना ही कोई दान पुण्य ,तीर्थ ना धाम, बस चौपाल में चौकड़ी लगाकर अंधाधुंध किसी की निंदा करना है और उससे उपजे रस का आनंद लेना है 😁😁😋।

निंदा और प्रशंसा दो बड़े ही विचित्र भाव हैं ,मुझे ऐसा लगता है कि समाज में अधिकतर समय साधारण विषयों पर चर्चा हो या आध्यात्मिक विषयों पर ,चर्चा का अंत या तो प्रशंसा करते हुए या निंदा करते हुए होता है। कड़वा सच है पर दो व्यक्ति आपस मे बात करते हैं और यदि  निंदा न करते हों तो वो पांच मिनट से ज्यादा बात नहीं कर पाएंगे , 5 तो फिर भी ज्यादा हो गया😁😁  हाय-हैलो से आगे बात नहीं बढ़ेगी😁😁। जब  हमारी कोई प्रशंसा करता है तो हमें अथाह सुख की अनुभूति होती है ,ऐसे लगता है जैसे मैं साक्षात देवराज इंद्र ही हूं और प्रशंसा का यह काव्य पाठ कभी रुकना नहीं चाहिए😋 वही जब हमारी कोई निंदा करता है और हमे पता चल गया तो हम उसको उसकी सारी पीढ़ी और पूर्वजों सहित अच्छे शब्दालंकारों से विभूषित कर देते हैं बता देते हैं इसकी औकात क्या है😁😁 । सच तो यही है कि बेचारा इंसान चिरकाल सेआनंद मार्गी है ,वह सत चित आनंद सतत खोजी रहा है इस यात्रा में वह कभी प्रशंसा का नैवेद्य ग्रहण करता है तो कभी निंदा का होम देता है । निंदा हो या प्रशंसा दोनों ही आनंद देते हैं, पहले में कोई और आनंद पाता है दूसरे में आप आनंद उठाते हैं😁😁 दोनों ही कर्मकांड में हम अपने अंदर उपस्थित अहं देव की सेविकाई को नहीं भूलते बल्कि लगातार आनंद की खोज और साधना जारी रखते है ।😁😁

आनंदमस्तु🙌🙌😁😁😁

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Satyam Tiwari

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