एक सवाल है आपसे , आप जब किसी चीज अनुभूति पहली बार करते है तो वो चीज आपको या तो बहुत अच्छी लगेगी या फिर गंदी । लेकिन अगर मैं कहूं की जो चीज आपको अच्छी लग रही वो चीज उतनी ही बुरी होती है तो आप विश्वास करेंगे।

जरा आप एक निबंध को देख लीजिए जब हम किसी विषय में निबंध लिखते है तो हम उसमे उस विषय के लाभ के साथ साथ उसके हानि को भी देखते है । बिल्कुल किसी सुख दुख के तराजू जैसा जो हमारे जीवन का नाप तोल करता हो ।

कहने का अर्थ है हमे हमेशा किसी चीज को लेकर एक तरफा नहीं होना चाहिए या सिर्फ उसके एक पहलू को ही बस नही देखना चाहिए। अगर 6 को उल्टा करोगे तो वो आपको 9 भी दिखता है और 9 को उल्टा करने पर  वो 6 भी दिखता है । कहने का सार है की जल्दबाजी में लिया गया फैसला उस अंधेरे कुएं के समान है जिसमें रोशनी आने की कोई गुंजाइश नहीं रहती।