A little girl…She loves her Master. She has no one but Him. He is her everything, her playmate, her study-partner, her best friend, her parent, her secret diary. She sees Master’s beautiful altars at the home of His children. This little girl has nothing pretty to offer Her master. ‘Conversation with Guru’ is her emotion which she confides in Him.

सुनहरा कर दिया आपको !    

उनके पास आपको सजाने को 

कितनी ही सुन्दर चीज़े हैं।

मखमली पीताम्बरी

और कस्तूरी की खुशबू में

भिगोकर रखते हैं आपको वो।

अरुणाभ क्षितिज समान

उजले आपके माथे पर

कुमकुम-चन्दन का

तिलक किया जाता है।

किसी सम्राट-सी सेवा होती है

मेरे सरकार की सबके घर पर।

स्वामी, उनके पूजा-स्थान में

आपकी तस्वीर के ऊपर

जो चांदी की छतरी है ना?

सामने रखे पीतल के बड़े से दीपक

पर उसका अक्स देखा है आपने !

किसी परिकथा-सी लगती है ना, प्रभु?

चम्पा की खिलखिलाती पंखुरियों में तो

मानो स्वयं प्रकृति ने हल्दी लगा दिया हो!

कि आपके चरणों को छूते ही

वह सुहागन हो जाएँ!

अब आप ही कहिये, स्वामी,

अखिल विश्व के विश्वनाथ हैं आप।

कैसे मैं बावरी आपको “नाथ” कह दूँ?

एक तो चैतन्य महाप्रभु से लम्बे आप,

और एक मेरे घर की छत किसी चूहे के बिल-सी। 

महलो में रखवाती है महादेवी आपको,

मैं कैसे कह दू आपसे कि

मेरी इस छोटी कुटिया में आइये?

56 भोग से जिनकी सेवा होती है,

कैसे उन्हें आधी-सूखी रोटी खिला दूँ?

गर्मी से तपती इस छत को

कैसे आपके सर का ताज बना दूँ?

तिलक के नाम पर इश्क़ के रंग का लहू है,

क्या खून ही आपके अरुणाभ माथे पर सजा दूँ ?

कस्तूरी-चन्दन-चंपा सबके घर पर हैं।

यहां है बस अवगुण मेरे

पीड़ा-मवाद से भरे,

जिनसे अनादिकाल से

विष रिस रहा है।

चांदी-पीतल के आप सरकार,

मेरी कुटिया में है

बस एक माटी का दीया।

शरीर के इस पिंजरे में जलता,

टुकुर-टुकुर किवाड़ निहारता,

कि अब आये, तब आये

आपकी आंधी,

और आज़ाद कर दे

शरीर के पिंजरे से

आत्मा की लौ को!

भला कैसे कह दूँ कि

अखिल ब्रम्हांड को

अपने तेज के

एक अंश मात्र में

धारण करने वाले आप

मेरी इस देह-रुपी कुटिया को भी

खुद में समा लीजिये?!

#प्रभु को समर्पित 

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Snigdha

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