सामान बहुत ज्यादा है स्वामीजी….क्या आप उठा पाएंगे ?
अरे नहिं नहिं शंका नहिं है आपके प्रति मन में मेरे ,
वो क्या है ना , मेरे कर्मों का बोझा बहुत भारी है स्वामीजी ।

थोडा आराम कर लिजिए…थोडा पानी पि लिजिए ,
रास्ते में कहिं आप थक ना जाए स्वामीजी ..
क्योंकी जाना बहुत हमें दूर है स्वामीजी ।

अब आप हि है मेरे कर्ता संवरता , मेरे दाता , मेरे प्रभू
आप हि को तो चलानी है मेरे जीवन की नैय्या स्वामीजी ।
मैं तो हार गयी हूं जन्म – म्रुत्यु के चक्कर कांटते कांटते स्वामीजी ,
थोडिसी दया किजिए प्रभू , लिजिए मेरे कर्मबंधन कि डोरी अपने हाथ में स्वामीजी ।

गुरू है तो भक्तों के कर्मों का भार उठाना हि है ना स्वामीजी ,
हम तो सबकुछ त्यागकर चल पडे है आप हि के सहारे ।
खुद चैन की सांस लेते है और हरवक्त आपको परेशान करते रहते है स्वामीजी ,
मेरा ये कम करवा दो…मेरा वो काम करवा दो ।
अब अपना कहा है , तो लगे हाथ निपटा दिजिए दो चार काम हमारे भी स्वामीजी ,
कर दिजिए हमें रीहा हमारे कर्मों से स्वामीजी ..
बड्डि मेहेरबानी होगी जी आपकी ।

तो क्या बोलते है आप स्वामीजी , कब free है जी आप ? कब call करूं आपको , कब meeting fix करूं आपके साथ ? कब आऊं आपके द्वार ?
आप तैय्यार है ना मेरे कर्मों का भार उठाने के लिए स्वामीजी 😉

किजिए किजिए थोडी exercise किजिए , थोडा jumping वगैरे किजिए …
वो क्या है ना सामान उठाना तो आप हि को है स्वामीजी ❤️❤️

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Amruta

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