I am obliged to get in touch of those feelings which erupt from certain unknown source resting in human silence to get its expression in the form of flowing language, words come in its own sequence as if the melodious notes get gather in consequential sweetest song or poetry or full music of its own kind flowed like as, Lord Krishna manoeuvred to compose it in serene and lovely environment of Vrindavan in the presence of Radha Rani and her friends on His simple devout, Flute. Lord Shiva, the Aadi Yogi thundered upon his celestial Damru enabling Him to manage the beautiful ever Tandava Nritya around his lovely Abode In Kailasa. Tansain the gem of Raga in the court of Badshaha Akbar did his best in making Nature weep in its silence. Poet Kalidasa composed the best possible poetry in depicting the dramatic art of expression like in Abhigyanshakuntlum, Meghdhut etc.. similarly William Shakespeare, Wordsworth, William Blake etc… produced best master pieces of grand poetry that still gives enthralling poise to readers. William Blake’s The Songs of Innocence and The Songs of Experience still remands me of my first ever discourse on this poetry in our English Department class room initiated by our Professor and Head Kalyan Chatterjee, where I was not of Convent background, when my all classmates were of St. Bedes College, Bishop Cottage School etc… Dr. Kalyan appreciated my continuous flow while speaking on William Blake for the whole period of forty minutes. It was due to my enjoyment of thoroughly studying my pet author Revered William Blake the entire semester.

 

मैं उन भावनाओं के संपर्क में आने के लिए बाध्य हूं, जो किसी अज्ञात स्रोत से मानव मौन में विश्राम करते हुए अपनी अभिव्यक्ति को प्रवाहित भाषा के रूप में प्राप्त करने के लिए निकलती हैं, शब्द अपने क्रम में आते हैं जैसे कि मधुर स्वर परिणामी मधुर गीत या कविता में एकत्रित हो जाते हैं या अपनी तरह का पूरा संगीत इस तरह प्रवाहित हुआ जैसे, भगवान कृष्ण ने राधा रानी और उनके दोस्तों की उपस्थिति में वृंदावन के शांत और प्यारे वातावरण में अपनी सरल भक्त, बांसुरी पर इसकी रचना करने के लिए युद्धाभ्यास किया। भगवान शिव, आदि योगी ने अपने आकाशीय डमरू पर गरज कर उन्हें कैलाश में अपने प्यारे निवास के चारों ओर सुंदर तांडव नृत्य का प्रबंधन करने में सक्षम बनाया। बादशाह अकबर के दरबार में राग के मणि तानसेन ने प्रकृति को उसके मौन में रोने का भरसक प्रयत्न किया। कवि कालिदास ने अभिज्ञानशाकुंतलम, मेगधूत आदि में अभिव्यक्ति की नाटकीय कला का चित्रण करते हुए सर्वोत्तम संभव कविता की रचना की। इसी तरह विलियम शेक्सपियर, वर्ड्सवर्थ, विलियम ब्लेक आदि… ने भव्य कविता के बेहतरीन मास्टर पीस तैयार किए जो आज भी पाठकों को मंत्रमुग्ध कर देते हैं। विलियम ब्लेक की द सॉन्ग्स ऑफ इनोसेंस और द सॉन्ग्स ऑफ एक्सपीरियंस अभी भी मुझे हमारे प्रोफेसर और हेड कल्याण चटर्जी द्वारा शुरू किए गए हमारे अंग्रेजी विभाग के क्लास रूम में इस कविता पर मेरे पहले प्रवचन की याद दिलाते हैं, जहां मैं कॉन्वेंट पृष्ठभूमि का नहीं था, जब मेरे सभी सहपाठी थे सेंट बेड्स कॉलेज, बिशप कॉटेज स्कूल आदि के डॉ. कल्याण ने चालीस मिनट की पूरी अवधि के लिए विलियम ब्लेक पर बोलते हुए मेरे निरंतर प्रवाह की सराहना की। यह मेरे पालतू लेखक श्रद्धेय विलियम ब्लेक के पूरे सेमेस्टर का पूरी तरह से अध्ययन करने के आनंद के कारण था।

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Behari Chauhan

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