Ashu's writings


बेशर्म तंदुरुस्ती

कई वर्षों बाद जब मैं बीमार पड़ा

क्या था उस सुनसान कमरे में

जिसकी वजह से मैं थोड़ा परेशान हो गया था

हल्दी नमक की कहानी

जो पढ़नी आवश्यक है

जब मैं करीब डेढ़ साल का था

और मेरी मां ने मुझे डूबने से बचाया

क्या ऐसी भी जिंदगी होती है

मर मर के जीना भी कोई जीना है

जिंदगी शिकायत करने का नाम नहीं है

खुशियां किसी व्यक्ति या वस्तु का मोहताज भी नहीं

वह 92 वर्ष का सक्रिय सन्यासी

जिनके जीवन से हमने कुछ सीखा

रिपब्लिक डे का दिन

जो हमे हमेशा याद रहेगा

बिना दवाइयों के कैसे स्वस्थ रहें

मेरी दिनचर्या, जो मुझे फिट रखती है

मेरा पर्सनल हेल्थ टिप्स

सिर्फ वही नियम जो मैं अवश्य करता हूं

क्यों लोग इतना पेड़ काटते हैं

क्या प्रकृति का दोहन करना ही विकास है

क्या था उस खंडहर के पास

जिसने मुझे एक तिलस्मी संघर्ष का हिस्सा बना दिया

वसुधैव कुटुंबकम् वाले हैं हम

सच्चाई जानते हुए भी अपने सिद्धांत पर जीते हैं

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