Snigdha's writings


9mo ago

कल्लूराम का जादुई ‘गुरु-मंतर’

"ए बाबा! चेला बनूँ रे! मंतर दे दे!"

10mo ago

What’s your ‘हाऊ’??

राम रूप धरि राबन मारेउँ पर कभहु न देखें 'हाऊ'

10mo ago

महामाई! गुरु-घर करनी चाकरी

मस्ती करें, लोग हँसायें, साधू-वेश में विष्णु आयें!

10mo ago

School Books vs. ब्रह्म-विद्या 😉😉

विद्या और पराविद्या की आँखें चार हुईं। ठाकुर ने देखा 'सागर' को। और 'सागर'...

10mo ago

मेरी अम्मा

पर अम्मा तो ठहरी अम्मा, पियार में पड़कर मोक्ष भी दान में दे देती...

12mo ago

13 फरवरी: जब महामाई जाग उठी (Part...

माँ, प्रभु से एक हो जाने का दिन तुम्हें भी मुबारक हो!

12mo ago

13 फरवरी: जब महामाई जाग उठी (Part...

माँ, प्रभु से एक हो जाने का दिन तुम्हें भी मुबारक हो!

1 year ago

चाय पर चर्चा

मन और मन के मालिक के बीच की बातें ।

1 year ago

Solitary Musings

The Creatrix who rocks the cradle of this infinite Universe has room for you...

1 year ago

वो और उसके गुरु

"I have discovered you. In you, I have found my everything."