Sadhvi's writings

प्रशंसा

स्तुति और प्रशंसा अगर सच्ची हो तो विनम्रता बढ़ती है, नही तो केवल अहंकार...

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चिंता

समस्या के समय चिंता ना करके, उसके समाधान पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए— तांडव...

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द्वन्द

मानसिक तनाव कभी शांति से सोचने की अनुमति नहीं देता— तांडव ऋंखला का ३०वाँ...

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माया

माया चक्र में फँस कर मनुष्य की बुद्धि, वास्तविकता देख नहीं पाती--तांडव ऋंखला का...

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मनोदशा

हमारी हर स्तिथि, हमारी मनोदशा पर निर्भर करती है--तांडव ऋंखला का २८वाँ प्रकरण

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इच्छायें

प्रसन्नता और समृद्धि में इच्छाओं की सीमा समाप्त हो जाती है--तांडव ऋंखला का २७वाँ...

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आसक्ति

आसक्ति का आरम्भ क्षणिक आनंद से होता है--तांडव ऋंखला का २६वाँ प्रकरण

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परिवर्तन

परिवर्तन, जीवन का एक स्थिर सत्य है--तांडव ऋंखला का २५वाँ प्रकरण

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“मैं हुँ ना!”

"चिंता मत करो, मैं हुँ ना।" गुरु के यह दिव्य शब्द बड़ी से बड़ी...

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आज्ञा और सेवा

गुरु की आज्ञा और सेवा परम सौभाग्य से प्राप्त होती है — तांडव ऋंखला...

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आतिथ्य

किसी अपरिचित को आतिथ्य प्रदान करना मानवता का एक विशिष्ट गुण होता हैं- तांडव...

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पूजा में प्रेम

पूजा में मंत्रों से अधिक, आराध्य के लिये प्रेम होना चाहिए !

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भक्ति का रंग

कैसा भी हो, चढ़ता ही है--तांडव ऋंखला का २०वाँ प्रकरण

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भावनाओं में परिवर्तन

भावनाओं में क्षण भर का परिवर्तन भी मन की दिशा बदल देता है —...

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सरलता

भक्ति का एक नाम सरलता भी है--तांडव ऋंखला का १८वाँ प्रकरण

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