Sadhvi's writings

भावनाओं में परिवर्तन

भावनाओं में क्षण भर का परिवर्तन भी मन की दिशा बदल देता है —...

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सरलता

भक्ति का एक नाम सरलता भी है--तांडव ऋंखला का १८वाँ प्रकरण

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वरदान

कभी कभी ईश्वर भी बिना तपस्या के वरदान देते है--तांडव ऋंखला का १७वाँ प्रकरण

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भावनायों की अभिव्यक्ति

क्या वास्तव में भावनायों की अभिव्यक्ति से सम्बंध सुदृढ़ होते है?-तांडव ऋंखला का १६वाँ...

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निपुण अध्यक्षता

निपुण अध्यक्षता ही एक सभा को एक भव्य समारोह में बदल सकती है।

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निःस्वार्थ सेवा

निःस्वार्थ सेवा से ईश्वर आपको स्वयं का स्वरूप देने के लिये बाध्य हो जाते...

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उत्सव

संघर्ष के बाद जीवन में उत्सव के भी पल आते है-तांडव ऋंखला का १३वाँ...

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अकारण तनाव

अकारण तनाव की अग्नि आनंद को भस्म कर देती है--तांडव ऋंखला का १२वाँ प्रकरण

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अकारण प्रसन्नता

अकारण प्रसन्नता ईश्वर का आशीर्वाद होती है---तांडव ऋंखला का ११वाँ प्रकरण

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आराध्य के साथ औपचारिकता

कभी कभी भगवान को भी भक्तों से काम पड़े -- तांडव ऋंखला का १०वाँ...

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तांडव – 9

नमस्ते अस्तु भगवान विश्वेश्वराय महादेवाय त्र्यंबकाय त्रिपुरान्तकाय त्रिकाग्नी कालाय कालाग्नी रुद्राय नीलकंठाय मृत्युंजयाय सर्वेश्वराय...

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तांडव-8

अतिसौम्यातिरौद्रायै नतास्तस्यै नमो नमः। नमो जगत्प्रतिष्ठायै देव्यै नमो नमः ॥

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तांडव – प्रकरण 7

सत्यम शिवम् सुंदरम !!

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तांडव – प्रकरण 6

चलत्कुण्डलं शुभ नेत्रं विशालं प्रसन्नाननं नीलकंठ दयालम | मृगाधीश चर्माम्बरं मुण्डमालं प्रिय शंकरं सर्वनाथं...

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तांडव – प्रकरण 5

नमस्ते नमस्ते विभो विश्र्वमूर्ते, नमस्ते नमस्ते चिदानन्दमूर्ते । नमस्ते नमस्ते तपोयोगगम्य, नमस्ते नमस्ते श्रुतिज्ञानगम्य...

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