Satyam Tiwari's Writings

“अंधेरे में”

'सिर से सीने में कभी ,पेट से पाँव में कभी ,एक जगह हो तो...

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“जगजननी”

'माँ, तुम आ गयीं😍😍🌼🌼🌺🌺

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“जगजननी”

'माँ आ ही गयी आखिर'

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“save Food”

" इतना ही लो थाली में, व्यर्थ न जाये नाली में"

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“किशन तुम निष्ठुर हो”

'इस विशाल प्रेम सागर को मैं अकेले कैसे पोषित करूँगी...??

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“ज़िदगी रोलर कोस्टर”..(2)

"कॉन्क्रीट ,पत्थर के ये भेड़िये मुझे खा जाने को आतुर थे"

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“ज़िदगी रोलर कोस्टर”

'मेरी प्रकृति, " प्रकृति प्रेमी" है ,संकीर्णता में मेरा दम घुटता है'

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ये तो एक स्वप्न था

बेवा हुई गलियां चीखती है, और सन्नाटा अट्टहास करता है

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“पेड़ और टहनी”

दुर्घटना ,पेड़ और टहनी की गति

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“थापिया न जाये कीता न होय, आपो-आप...

"डोर पकड़े है सिरा मिलता नही,फ़लसफी को बहस में ख़ुदा मिलता नही"

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“सफ़र”

'बस ,रास्ते के पेड़, इमारतों को तेजी से पीछे छोड़ते हुए निकल गयी'

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“तू भी चले, मैं भी चलूँ”

'समर्पित सभी प्रेमियों के लिए', समर्पित उस परम् प्रेयसी के लिए☺

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“खंडहर”

' जैसे मेरा वर्षो से नाता हो इनसे'

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“प्रेम”

'प्रेम त्याग की धूनी में रमता है'

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“Thankyou”

ये शब्द शायद कम है ,इस उपकार के लिए😊

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